असल में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अब केवल सरकार चलाने की भूमिका में नहीं, बल्कि अपनी ही सरकार के संकटमोचक के तौर पर भी नजर आ रहे हैं। हालिए में कुछ मामलों में पुलिस-प्रशासन और स्थानीय स्तर के नेताओं के प्रयास जब जनता के आक्रोश और संगठनों के विरोध को शांत नहीं कर पाए, तब मुख्यमंत्री ने सीधा हस्तक्षेप से गतिरोध टूटा।
राजनीतिक तौर पर यह सैनी के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है। हिसार के डेयरी संचालक जीवन कुंडू हत्याकंड को लेकर संघर्ष समिति और पुलिस प्रशासन के बीच लगभग दो सप्ताह से गतिरोध चल रहा था। जब सीएम सैनी ने बातचीत की, तो यह विवाद समाप्त हुआ।
यह मामला भी सैनी ने निपटाया
इतना ही नहीं, पंजोखरा साहिब गुरुद्वारे में पंजाब के खालिस्तान विरोधी नेता गुरसिमरन सिंह मंड के साथ मारपीट के मामले में गिरफ्तार लोगों की रिहाई को लेकर पुलिस और सिख संगत के बीच तनाव भी सैनी के हस्तक्षेप के बाद ही समाप्त हुआ है। असल में तनाव इतना बढ़ गया था कि सिख संगीत के रोष से प्रशासन के हाथ-पांव खोल फूल गए थे, मगर सैनी सबको मनाने में सफल रहे।
करनाल मामला को भी सैनी ने शांत करवाया
इसके अलावा, सीएम नायब सैनी ने करनाल में बीरु बाल्मीकि हत्याकंड के बाद हर्ष और बीरबल के एनकाउंटर को लेकर रोड समाज में नाराजगी थी। यह मामला भी मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद शांत हो गया। इन घटनाओं में एक सामान बात यह रही है कि स्थानीय स्तर पर बढ़ता विवाद सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन रहा था और सीएम ने सीधे बातचीत कर इसे खत्म करने की कोशिश कर दी है।
चनाैत प्रकरण के बाद आया बदलाव
जानकारी के अनुसार, चनौत प्रकरण के बाद मुख्यमंभी के संकट से निपटने के तौर-तरीके में बदलाव देखा गया है। इस मामले को सुलझाने के मुख्यमंत्री के प्रयास सफल नहीं हो पाए और पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के हस्तक्षेप के बाद गतिरोध खत्म हुआ। इससे राजनीतिक तौर पर यह संदेश गया है कि सरकार में संकट के समाधान के लिए एक से अधिक प्रभावी केंद्र मौजूद है।
वैसे यह स्थिति किसी भी सरकार के लिए असहज हो सकती है, क्योंकि इससे सीएम के नेतृत्व और निर्णय क्षमता को लेकर सवाल उठने लगते हैं। हाल ही के मामलों में सैनी का सीधा हस्तक्षेप इसी धारणा को बदलने की कोशिश के तौर पर देखा जाता है। वहीं, अगर मामला सुलझाता नहीं, तो सरकार की छवि खराब हो जाती है। इसलिए मुख्यमंत्री खुद आगे आकार मामले को सुलझाते हैं, जिसका सीधा फायदा उनका नेतृत्व और सरकार की छवि को बेहतरीन बनाने का है।