Bengal-Assam Election: SC-ST सीटों पर BJP का 'मास्टरस्ट्रोक', विपक्ष का सूपड़ा साफ

पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव में आरक्षित सीटों पर बीजेपी-एनडीए ने विपक्ष को करारी शिकस्त दी है। दोनों राज्यों की सभी आदिवासी (ST) सीटों पर भगवा लहराया, वहीं ज्यादातर दलित (SC) सीटों पर भी एनडीए का कब्जा विपक्ष की दलित-आदिवासी राजनीति के लिए एक बड़ा झटका है।
असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणामों के देखकर सूक्ष्म विश्लेषण से विपक्ष दलों की सियासी नींदें उड़ सकती हैं। दोनों ही राज्यों में जितनी आदिवासी सीटें हैं, उन सब पर भाजपा या उसके अगुवाई वाले एनडीए गठबंधन ने बाजी मार दी है।
वहीं, असम और बंगाल में भी दलितों के लिए जितनी सुरक्षित सीटें हैं, उनमें से ज्यादातर भाजपा और एनडीए कब्जा किए हुई है। उत्तर भारत के इन दोनों राज्यों के नतीजे अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश और पंजाब विधानसभा चुनावों के लिए काफी मायने रखता है।
पश्चिम बंगाल की सारी एसटी सीटें भाजपा के खाते में
बंगाल में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या में भाजपा ने सीधे 9 सीटों का इजाफा कर लिया है। जबकि टीएमसी का इन सीटों पर खाता भी नहीं खुला, जबकि पूरा आदिवासी वोट बीजेपी में गया है और उसने सीटें जीत लीं।
बंगाल में दलितों के लिए आरक्षित सीटों पर भाजपा का दबदबा
पश्चिम बंगाल में दलितों के लिए आरक्षित सीटों पर भी भाजपा ने जबरदस्त बढ़त बना ली है। 68 सीटों में से भाजपा 51 सीटों पर अकेले जीत मिली है और टीएमसी के खाते में सिर्फ 17 सीटें गई हैं। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी काफी समय से दलित-आदिवासी-ओबीसी की राजनीति करने के कोशिशों में लगे हैं, उससे उन्हें जोरदार झटका लग चुका है।
असम की एससी और एसटी सीटों पर एनडीए का धमाका
असम में भी आदिवासियों के लिए आरक्षित सभी सीटें भाजपा और उसके सहयोगी के खाते में गई हैं। इसी तरह से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों में भी भाजपा और उसके सहयोगी का दबदबा कायम है। कांग्रेस ने सिर्फ एक सीट जीती है।



