Delhi Voter List में Form 6 भरते ही बढ़ी उलझन, SMS में आए BLO सत्यापन से कर रहे इनकार

दिल्ली में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरने वाले आवेदकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। चुनाव आयोग द्वारा भेजे गए संदेशों में नामित बीएलओ आवेदकों को पहचानने या अपने अधिकार क्षेत्र में होने से इनकार कर रहे हैं। साथ ही बार-बार बीएलओ बदलने से लोग सत्यापन को लेकर काफी भ्रमित हैं।
राजधानी दिल्ली में एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर काफी उलझन देखने को मिल रही है। ऐसे में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने की प्रक्रिया शुरु करते ही आवेदक नई परेशानी में फंस जाते हैं। फॉर्म-6 भरने के बाद चुनाव आयोग की तरफ से मोबाइल पर भेजे जा रहे हैं,
परेशानी जब बढ़ती है, तब आवेदक संदेश में दिए गए नंबर पर संपर्क करते हैं और संबंधित बीएललो उन्हें अपना आदेवक मानने से ही इनकार कर देते हैं। यानी के आयोग के संदेश में जिस अधिकारी को सत्यापन की जिम्मेदारी दी जा रही है।
फिर फोन पर वही अधिकारी इससे अनजान नजर आता है। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से इस तरह के मामले देखने को मिल रहे हैं, जहां मतदाता बनने की पहली सीढ़ी पर ही आवेदकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
आपको बताते चलें कि, नजफगढ़ के रोशन गार्डन के पंकज को एक ही दिन में तीन बार बीएलओ बदलने के संदेश मिले। उन्होंने सभी बीएलओ को फोन किया, लेकिन जवाब मिला कि उन्हें नहीं पता कि आवेदक कौन हैं और उनका नाम सूची में नहीं है। इस तरह से राज को भी बीएलओ बदलने का संदेश मिलने के बाद नए अधिकारी को फोन करने पर ऐसा ही जवाब सुनने को मिला।
वहीं, राज ने जब कहा कि चुनाव आयोग ने ही उनका नाम और नंबर भेजा है,तो वह किससे संपर्क करें? इस पर बीएलओ ने जवाब दिया कि उनके पास आवेदक का नाम नहीं है। दूसरी ओर, संगम विहार के विवेक ने अपने बीएलओ से जानकारी लेने के लिए फोन किया तो नाम और पता बताते ही अधिकारी ने कह दिया कि उनका पता उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
तीन दिन में दो बार बदले बीएलओ
नजफगढ़ के निवासी सन्नी के मुताबिक, किसी कारण से एसआईआर प्रक्रिया में उनका नाम मतदाता सूची से हट गया था। जिसके बाद उन्होंने कुछ दिन पहले चुनाव आयोग की वेबसाइट के जरिए फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वाने के लिए आवेदन किया। 24 सितंबर को उनके मोबाइल पर संदेश आया कि आदेवन के लिए सत्यापन के लिए एक बीएलओ नियुक्त किया गया है।
अभी वह प्रक्रिया को समझ रहे थे कि 27 सितंबर को एक और संदेश आ गया। इसमें पहले बताए गए बीएलओ की जगह दूसरे अधिकारी का नाम और नंबर दिया गया था। सन्नी ने बताया कि, यह परेशानी सिर्फ उनकी ही नहीं, बल्कि सैकड़ों आवेदकों की है।
सत्यापन की जिम्मेदारी से अनजान अधिकारी
इसके अलावा, नजफगढ़ के निवासी राहुल बताते है कि संदेश में जिस अधिकारी का नबंर दिया गया था, उससे संपर्क करके पता चला कि वह संबंधित क्षेत्र का बीएलओ ही नहीं है। ऐसे में लोग सवाल कर रहे हैं कि सत्यापन के लिए संबंधिक जानकारी आवेदक को पहचानने से साफ इनकार कर रहे हैं।



