झारखंड में SIR के बाद पहला इम्तिहान, Giridih Bypoll में नई वोटर लिस्ट से बदलेगा समीकरण

झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच गिरिडीह विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने जा रहा है। पूर्व विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के निधन से खाली हुई इस सीट पर नई वोटर लिस्ट का बड़ा असर दिखेगा। झामुमो और भाजपा ने अभी तक अपने प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
इस समय झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है। कांग्रेस सहित विपक्षी दल निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं और इसके विरोध में अंदोलन भी कर रहे हैं। इस दौरान, झारखंड में एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद पहली बार विधानसभा उपचुनाव होने जा रहा है।
यह उपचुनाव गिरिडीह विधानसभा सीट पर होगा। मंत्री और विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद यह सीट खाली है।
वहीं, 19 अक्तूबर को राज्य में एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची जारी होने का कार्यक्रम है। ऐसे में इस उपचुनाव में नई मतदाता सूची की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
एसआईआर के बाद बदली मतदाता सूची पर रहेंगी सबकी नजरें
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि एसआईआर के बाद मतदाता सूची में हुए बदलाव का गिरिडीह के चुनावी समीकरण पर कितना असर पड़ेगा। कितने नाम हटे, कितने नए मतदाता जुड़े और किन इलाकों में मतदाताओं की संख्या में बदलाव आया, इन आंकड़ों पर राजनीतिक दलों की नजर रहेगी। खासकर इन क्षेत्रों पर ध्यान रहेगा, जहां बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों से आकार लोग बसे हैं। गिरिडीह जिला निर्वाचन कार्यालय के पोर्टल पर एसआईआर 2026 के ड्राफ्ट रोल और दावे-आपत्तियों से संबंधित जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है।
झामुमो और भाजपा के प्रत्याशियों की घोषणा बाकी
इसको लेकर झामुमो और भाजपा ने अभी अपने प्रत्याशियों की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। झामुमो की तरफ से सुदिव्य सोनू के परिवार से जुड़े नामों की चर्चा है, जबकि भाजपा में पूर्व सांसद रविंद्र राय सहित कई नामों की चर्चा चल रही है। लेकिन अभी तस्वीर प्रत्याशियों की घोषणा के बाद ही साफ होगी।
नई वोटर लिस्ट पर टिका रहेगा चुनावी समीकरण
दरअसल, गिरिडीह उपचुनाव में महत्वपूर्ण सवाल सिर्फ दलों के बीच मुकाबले का नहीं, बल्कि SIR के बाद बदली मतदाता सूची का भी होगा। अंतिम मतदाता सूची में कितने नाम जुड़ते या हटते हैं और किन क्षेत्रों में मतदातों की संख्या में बदलाव होता है, यह उपचुनाव के दौरान राजनीतिक दलों और प्रत्याशियों के मुख्य विषय है।



