Rajasthan में UCC पर Bhajanlal Govt का बड़ा एक्शन, कानून का ड्राफ्ट बनाने के लिए कमेटी गठित

दिव्यांशी भदौरिया     Jun 23, 2026
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Rajasthan में UCC पर Bhajanlal Govt का बड़ा एक्शन, कानून का ड्राफ्ट बनाने के लिए कमेटी गठित

राजस्थान में भजनलाल सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में समिति गठित की है। यह कदम भाजपा के वैचारिक एजेंडे को आगे बढ़ाता है और इसके तहत लिव-इन रजिस्ट्रेशन व संपत्ति में समान अधिकार जैसे प्रावधानों से 2028 चुनाव से पहले कोर वोटर्स को साधने की कोशिश मानी जा रही है।

राजस्थान में भजनलाल की सरकार ने बड़ा कदम उठाने जा रही है। दरअसल, राजस्थान में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में भजनलाल सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाष देसाई की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समिति गठित कर दी है, जो राजस्थान यूनिफॉर्म सिविल कोड-2026 का मसौदा तैयार करेगी। 

असल में 14 अप्रैल को हुई कैबिनेट की बैठक में यूसीसी लाए जाने के प्रस्ताव पर सहमति बन चुकी थी। सरकार ने इस पर एकदम और आगे बढ़ चुकी है।

पॉलिटिकल एक्सपर्ट का मानना है कि भाजपा लंबे समय से UCC को अपने वैचारिक एजेंडे का मुख्य हिस्सा मान रहा हैय़ उत्तराखंड के बाद अब राजस्थान में इस दिशा में पहल कर बीजेपी एक बार फिर से अपने कोर वोटर को मजबूत कर देगी। पार्टी अपने प्रमुख चुनावी और वैचारिक वादों को जमीन पर उतार रही है।


क्या होंगे बड़े बदलाव?

प्रस्तुत UCC में विवाह और तलाक का अनिवार्य पंजीकरण, बहुविवाह पर रोक, लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन और पैतृक संपत्ति में बेटा-बेटी को समाम अधिकार जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आदिवासी समुदायों की परंपराओं और संवैधानिक सुरक्षा को बरकारर रहेगा। 


2028 चुनाव से पहले वैचारिक मुद्दों पर फोकस

राजस्थान में अगले विधानसभा चुनाव साल 2028 में होने वाले हैं। इस दौरान सरकार विकास और प्रशासनिक फैसलों के साथ-साथ वैचारिक मुद्दों को भी राजनीतिक विमर्श के केंद्र में लाने की तैयारी में है। राम मंदिर, धारा 370 और तीन तलाक के बाद UCC को भाजपा और संघ परिवार के प्रमुख एजेंडों में गिना जाता है।

सरकार मानकर चल रही है कि समान नागिरक संहिता महिलाओं को समान अधिकार देने, विवाह और तलाक की प्रक्रिया को एकरुप बनाने और व्यक्तिगत कानूनों में मौजूद असमानताओं को खत्म करने की दिशा में बड़ा सुधार साबित हो सकता है।


जनसंवाद के जरिए सहमति बनाने की कोशिश

इस दौरान सरकार समिति को संभाग स्तर पर जनसंवाद और आम लोगों से सुझाव लेने की जिम्मेदारी भी दिया है। इसका राजनीतिक महत्व से जोड़ा जा रहा है, क्योंकि इससे सरकार यह संदेश देना चाहती है कि कानून किसी भी समुदाय का विशेष को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि व्यापक परामर्श के आधार पर तैयार किया जा रहा है।