Rajasthan Election 2023: इन 5 प्वाइंट्स में समझिए राजस्थान की राजनीति का पूरा समीकरण, बीजेपी-कांग्रेस कौन किस पर भारी

अनन्या मिश्रा     Nov 15, 2023
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Rajasthan Election 2023: इन 5 प्वाइंट्स में समझिए राजस्थान की राजनीति का पूरा समीकरण, बीजेपी-कांग्रेस कौन किस पर भारी

राजस्थान में विधानसभा चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां आक्रामक रुख अपना रही हैं। हर विधानसभा चुनाव में राजस्थान की सत्ता में परिवर्तन होता है। यानी की एक बार कांग्रेस राजस्थान की सत्ता हासिल करती है, तो वहीं एक बार बीजेपी सत्तारूढ़ होती है।

राजस्थान में विधानसभा चुनावों को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियां आक्रामक रुख अपना रही हैं। बता दें कि राज्य में 30 सालों से जो एक चीज सबसे ज्यादा दिलचस्प होती है, वह यह है कि हर विधानसभा चुनाव में राजस्थान की सत्ता में परिवर्तन होता है। यानी की एक बार कांग्रेस राजस्थान की सत्ता हासिल करती है, तो वहीं एक बार बीजेपी सत्तारूढ़ होती है।

 

लेकिन इस बार राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत इस रिवाज को बदलने की ठान चुके हैं। वहीं कांग्रेस के राहुल गांधी ने भी दावा किया है कि राज्य में एक बार फिर कांग्रेस सरकार बनने जा रही है। राहुल ने यह भी कहा कि उनको अशोक गहलोत पर पूरा भरोसा है। 


सत्ता परिवर्तन का बदलेगा रिवाज?

हांलाकि इस विधानसभा चुनाव में राजस्थान की सत्ता परिवर्तन की रिवाज बदलेगा या नहीं, लेकिन भाजपा ने सत्ता परिवर्तन के रिवाज को कायम रखने के लिए मजबूती के साथ मैदान में उतरी है। वहीं सीएम गहलोत अपने राज को कायम रखने के लिए हर सियासी पैतरा आजमा रहे हैं। सीएम गहलोत ने जनता के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं का पिटारा खोला है। सीएम अशोक गहलोत अपनी योजनाओं को गेम चेंजर मानते हैं। हांलाकि कांग्रेस की सत्ता योजनाओं के जरिए वापसी हो या ना हो, लेकिन सत्ता परिवर्तन करने के भरोसे के साथ बीजेपी उन्हें टक्कर देती जरूर दिख रही है। 


वसुंधरा राजे को किनारे करना

हांलाकि पहले यह सिर्फ चर्चा थी कि बीजेपी की तरफ से राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को किनारे किया जा रहा है। लेकिन अब इस बात पर पूरी तरह से मुहर लग चुकी है। हांलाकि भाजपा को भी पता है कि वसुंधरा राजे को किनारे कर पार्टी जोखिम उठा रही है। इस चुनाव में सिर्फ एक ही चेहरा रखा गया है और वह चेहरा कमल का है। वसुंधरा की उपेक्षा को बीजेपी में संघ की रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है। जिसके कारण ना सिर्फ प्रदेश बल्कि देश की सियासत को बदलने का प्रयास कर रही है।


दीया कुमारी वसुंधरा का विकल्प?

राजस्थान बीजेपी में एक तरफ जहां वसुंधरा राजे को दरकिनार किया जा रहा है। तो वहीं दूसरी ओर वसुंधरा राजे के विकल्प के तौर पर भाजपा सामने ला रही है। यही कारण ही कि पीएम मोदी की जयपुर में रैली के दौरान मंच संचालन का काम दीया कुमारी को सौंपा गया था। मंच संचालन की जिम्मेदारी आम तौर पर पार्टी के वरिष्ठ और भरोसेमंद नेताओं को दी जाती है। वहीं दीया कुमारी और वसुंधरा राजे दोनों ही राजस्थान के शाही परिवारों से ताल्लुक रखती हैं। दोनों महिला नेताओं का अपने-अपने क्षेत्र में काफी अच्छा प्रभाव है। 


गहलोत-पायलट का झगड़ा

वैसे तो इन दिनों राजस्थान में कांग्रेस के दोनों खेमों में राहत नजर आ रही है। लेकिन गहलोत-पायलट में चल रही लंबे समय से कड़वाहट अब नरमी में तब्दील होती नजर आ रही है। हांलाकि यह कांग्रेस के लिए राहत भरी खबर है। लेकिन अगर गहलोत और पायलट में फिर से मतभेद होता है, तो इसका खामियाजा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को भुगतना पड़ सकता है। क्योंकि कई विधानसभा सीटों पर सचिन पायलट का अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है।


ओवैसी काटेंगे मुस्लिम वोट

बता दें कि इस बार विधानसभा चुनाव में AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी भी राजस्थान विधानसभा चुनाव में उतरे हैं। ऐसे में राज्य के अलवर, भरतपुर, सवाई माधोपुर और टोंक में मुस्लिम आबादी खासा असर रखती है। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इन क्षेत्रों की 29 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन ओवैसी के मैदान में उतरने से कांग्रेस के वोट पर असर पड़ सकता है।