Tamil Nadu-Puducherry Lok Sabha: क्या तमिलनाडु-पुदुचेरी में DMK फिर से दिखाएगी धाक, बढ़त बनाने की जुगत में जुटी बीजेपी

अनन्या मिश्रा     Apr 02, 2024
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Tamil Nadu-Puducherry Lok Sabha: क्या तमिलनाडु-पुदुचेरी में DMK फिर से दिखाएगी धाक, बढ़त बनाने की जुगत में जुटी बीजेपी

तमिलनाडु-पुदुचेरी की सभी 40 सीटों पर जीत हासिल करने के लिए द्रमुक प्रमुख और मुख्यमंत्री एम.के स्टालिन ने मिशन-40 शुरू किया। तो वहीं भाजपा ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

इस समय लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सभी सियासी पार्टियां तैयारियों में जुटी हैं। वहीं इन दिनों चुनाव आयोग के अधिकारी राज्यों के दौरे पर हैं। बता दें कि आयोग ने आम चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। देश में कुल 543 लोकसभा सीटों पर चुनाव होना है। वहीं दक्षिण के पांच राज्य में लोकसभा की कुल 130 सीटें हैं। वहीं तमिलनाडु-पुडुचेरी में 40 सीटें आती हैं। तमिलनाडु-पुदुचेरी की सभी 40 सीटों पर जीत हासिल करने के लिए द्रमुक प्रमुख और मुख्यमंत्री एम.के स्टालिन ने मिशन-40 शुरू किया। तो वहीं भाजपा ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।


जानिए क्या कहते हैं सर्वे

एक सर्वे के मुताबिक तमिलनाडु-पुदुचेरी की कुल 40 लोकसभा सीटों में डीएमके पार्टी को 20 सीटें मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। जहां कांग्रेस पार्टी को 6 तो AIADMK को 4 सीटों पर जीत हासिल हो सकती है। वहीं भाजपा 5 सीटों पर बढ़त बनाते हुए दिखाई दे रही है। इसके अलावा अन्य पांच सीटों पर बढ़त बनाए दिख रही है। बीजेपी तमिलनाडु की 4 और पुदुचेरी की 1 सीट पर जीत हासिल कर सकती है।


INDIA और NDA

तमिलनाडु में DMK विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A के सहयोगी दलों के साथ चुनावी मैदान में उतरेगा। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में डीएमके, कांग्रेस और वाम दलों के गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन कर 40 में से 39 सीटों पर जीत हासिल की थी। 2019 में DMK 24 सीटों से चुनाव लड़ी थी, इसमें से पार्टी ने 23 सीटों पर जीत हासिल की थी। वहीं कांग्रेस को 9 सीटों में से 8 सीट पर जीत मिली थी। इसके अलावा भाकपा और सीपीआईएम को 2-2 सीटें मिली थी।


बता दें कि इस साल यानी की 2024 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु की 39 और पुडुचेरी की एक लोकसभा सीट पर जीत हासिल करने के लिए NDA और विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A के बीच मुकाबला है। इसके साथ ही I.N.D.I.A गठबंधन के लिए इन सीटों पर फिर से जीत हासिल करने की चुनौती है, तो NDA भी दक्षिण राज्यों में सीटें बढ़ाने की जुगत में लगी है। जिससे कि उत्तरी राज्यों में होने वाली संभावित कमी को पूरा किया जा सके।