दरअसल, पश्चिम बंगाल की पूर्व ने चक्रावात अम्फान राहत योजना को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट ने कई गंभीर अनियमितताओं की तरफ इशारा किया है। रिपोर्ट में कहा है कि अम्फान से हुए नुकसान का आकलन कई मालमों में बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया है।
वहीं, राहत वितरण में गड़बड़ियां, लाभार्थियों की सूची में दोहराव और भुगतान प्रक्रिया में खामियां भी सामने आईं। प्रिंसिपल अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट-।।) मनीष कुमार ने कहा कि कैग ने राज्य सरकार को अम्फान राहत व्यवस्था में सुधार के लिए 6 प्रमुख सिफारिशें दी हैं। यह भी कहा कि उन्हें जिलों से आने वाली नुकसान की रिपोर्ट को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने की जरुरत है, ताकि आपदा प्रबंधन और राहत कार्य तरीके से किए जा सकें।
कैग ने क्या-क्या सिफारिशें कीं?
- आपदा से हुए नुकसान का सही और वैज्ञानिक तरीके से आकलन करें।
- राहत सहायता के लिए एक समान और व्यापक आवेदन प्रक्रिया लागू की जाएगी।
- लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो, क्योंकि कई मामलों में एक ही व्यक्ति का नाम दो बार पाया गया।
- राहत राशि जारी करने से पहले सभी अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड की अनिवार्य जांच होगी।
- साथ ही राहत सामग्री के भंडारण और वितरण की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जाए।
- कई मामलों में अनियमित या संदिग्ध भुगतान हुआ है, उनकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कर्रवाई होगी।
नुकसान के दावों पर उठे सवाल
मनीष कुमार ने बताया कि रिपोर्ट में आवास, कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन और पेयजल जैसे तमाम क्षेत्रों में नुकसान की समीक्षा की गई है। उन्होंने यह भी बताया है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने आवास क्षेत्र में करीब 24 लाख मकानों के क्षतिग्रस्त होने का दावा किया है। लेकिन 18,000 करोड़ रुपये की सहायता मांगी थी।
राज्य ने मांगे थे 35,018 करोड़ रुपये
कैग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल सरकार ने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष ((एनडीआरएफ) से 35,018 करोड़ रुपये मांगे गए थे। लेकिन केंद्र सरकार की जांच और मूल्याकन के बाद एनडीआरएफ ने सिर्फ2,707 करोड़ की सहायता की सिफारिश की थी।