जल्द ही एनडीए का कुनबा बड़ा होने जा रहा है, जिससे विपक्षी खेमे को बड़ा झटका लग सकता है। खासकर, तमिलनाडु से द्रमुक को एनडीए में लाने और केंद्र में प्रतिनिधित्व के लिए मोदी मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार से पूर्व अंतिम दौर की वार्ता जारी है।
पंजाब से महाराष्ट्र तक हलचल
शरद पवार की एनसीपी के भी साथ आने के संकेत हैं। अकाली दल को लाने का रास्ता भी खोजा जा रहा है। बीजेपी की यह कवायद परिसीमन से संशोधन को दोबारा आगे बढ़ाने और महिला आरक्षण जल्द लागू करने की रणनीति मानी जा रही है।
सूत्रों से पता चला है कि द्रमुक व एनसीपी के एनडीए में आने पर सहमति बन गई है। दोनों सदनों में 30 सांसदों वाली द्रमुक दो मंत्री पद चाहते हैं। दूसरी तरफ, एनसीपी से सुप्रिया सुले को मंत्री बनाने की संभावना दिख रही है। इस महीने के अंत में मंत्रिमंडल विस्तार संभव है। द्रमुक के लोकसभा अध्यक्ष की चाय पार्टी में शामिल होने के बदले समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है।
शरद की एनसीपी के भी साथ आने के संकेत
-लोकसभा- दो तिहाई बहुमत से सिर्फ 4 सांसद कम रहे जाएंगे।
-लोकसभा में सरकार और सहयोगी दलों के पास अभी 325 सांसद हैं। डीएमके के 22 और एनसीपी के आठ सांसदों के साथ यह संख्या 355 पहुंच जाएगी।
- 360 सांसद चाहिए दो-तिहाई बहुमत के लिए। ऐसे में 5 सदस्यों की कमी रह जाएगी।
राज्यसभा : बस एक की कमी
-असल में राज्यसभा में निर्दलीय व मनोनीत सदस्यों सहित एनडीए के पक्ष में 154 सांसद है। द्रमुक के 8, एनसीपी के एक सांसद से संख्या 163 हो जाएगी।
- वहीं दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सदस्य चाहिए, बस एक कदम से दूर रह जाएगी सरकार।
स्टालिन से लेकर पवार तक कैसे बदले समीकरण
- जब मई में 5 राज्यों के नतीजे आए तो तमिलनाडु में कांग्रेस चुनाव पूर्व गठबंधन छोड़कर टीवीके के साथ चली गई है। इसी कारण से द्रमुक से अलगाव हो गया है।
- हाल में परिसीमन पर टीवीके की बैठक में भी द्रमुक सांसद नहीं पहुंचे थे।
- संसद के आखिरी दिन स्पीकर की चाय पार्टी का कांग्रेस ने बहिष्कार किया, वहीं द्रमुक नेता कनिमोझी शामिल हुए।
- शरद पवार की सांसद पुत्री सुप्रिया सुले ने कहा था कि 50% सीटें बढ़ाने पर उनकी पार्टी परिसीमन का समर्थन कर सकती हैं।