गुरुवार को संसद में माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 पास कर दिया गया है। असल में इस बिल का उद्देश्य मिनरल राइट्स और मिनरल वाली जमीनों पर टैक्स लगाने के राज्यों के अधिकारों को सीमित करना है।
सरकार ने बताया है कि नए कानून का उद्देश्य राज्यों की स्वायत्तता में जरा-भी दखल देने नहीं है, बल्कि मिनरल की दरों में एकरुपता लाना है। लेकिन बिल के पारित होते ही केरल और झारखंड ने केंद्र सरकार को धमकी दी है।
खनन और खनिज बिल पर कांग्रेस ने छोड़ा मैदान
बुधवार को लोकसभा में खनन और खनिज बिल पास किया, वहीं राज्यसभा ने गुरुवार को इसे मंजूरी दी है। लेकिन चर्चा में कांग्रेस का कोई सांसद शामिल नहीं हुआ। लेकिन DMK, BJD, RJD और वामदालों सहित अन्य विपक्षी पार्टियों ने सवाल उठाए कि क्या इस कानून का राज्य सरकारों के रेवेन्यू पर बुरा असर तो नहीं पड़ेगा।
कोयला, चूना पत्थर, लोहा, तांबा-मैंगनीज पर भिड़े
दरअसल, सदन में बहस का जवाब देते हुए माइंस मिनिस्टर जी किशन रेड्डी ने भरोसा दिलाया है कि केंद्र सरकार कोयला, चूना पत्थर, लौह अयस्क, तांबा और मैंगनीज जैसे मुख्य खनिजों को नियमित करना चाहती हैं। लेकिन 49 गौण खनिजों पर राज्यों का अधिकार बना रहेगा।
केंद्र सरकार कोयला, चूना पत्थर, लौह अयस्क, तांबा और मैंगनीज जैसे प्रमुख खनिजों को रेगुलेट करना चाहती है, जबकि 49 गौण खनिजों पर राज्यों का अधिकार बना रहेगा। -जी किशन रेड्डी, माइंस मिनिस्टर
UPA के कार्यकाल में आवंटित कोयला ब्लॉक एक घोटाला थे, जबकि पिछले 12 वर्षों में खनिजों का आवंटन पारदर्शी रहा है। -जी किशन रेड्डी, माइंस मिनिस्टर
हेमंत सोरेन ने दी धमकी
- झारखंड के सीएम हेमेंत सोरने ने इस कानून को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन की घोषणा की है और चेतावनी दी कि अगर केंद्र ने इसे वापस नहीं लिया तो पूरा देशन इसके पैमाने को देखेगा।
- वहीं, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा कि उनकी सरकार नए कानून का विरोध करेगी, यह आरोप लगाते हुए प्रस्तावित बदलाव जमीन पर राज्यों के अधिकारों का अतिक्रमण करेंगे।