शुक्रवार को जयपुर के बगरू क्षेत्र में स्कूल की जांच करने पहुंची कॉकरोच जनता पार्टी की टीम को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाए है कि ग्रामीणों ने उनके साथ मारपीट की, शर्ट फाड़ दी और मोबाइल तोड़ दिया। सीजीपी के प्रवक्ता ने दावा किया कि टीम के वाहनों के शीशे भी तोड़े गए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ग्रामीण सीजेपी कार्यकर्ताओं को खदेड़ते और वाहनों पर हमला कर रहे हैं। जब एक कार्यकर्ता के पीछे छूटने पर ग्रामीणों ने उसके साथ मारपीट की।
दरअसल, सीजीपी कार्यकर्ताओं के वहां पहुंचते ही ग्रामीणों और भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ उनकी धक्का-मुक्की हो गई। ग्रामीण ने बताया था कि वे स्कूल को अपने स्तर पर ही ठीक करा लेंगे क्योंकि सरकार की तरफ से इसके लिए 12.50 लाख रुपए स्वीकृत किए है। वहीं, उन्होंने सीजेपी कार्यकर्ताओं को 'बाहरी व्यक्ति' बताते हुए गांव से धक्का देकर बाहर निकाल दिया।
स्कूल की बदहाल स्थिति को देखने के लिए था दौरा
आपको बताते चले कि सीजेपी की टीम का जयपुर में दो सरकारी स्कूलों- रामपुरा कंवरपुरा और वाटिका रोड स्थित भट्ठा वाला राजकीय स्कूल का दौरा करने का कार्यक्रम था। पार्टी का कहना है कि वहां की शिक्षा व्यवस्था, बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं और स्कूल की इमारतों का जायजा लेना था। असल में रामपुरा-कंवरपुरा का प्राथमिक स्कूल पूरी तरह जर्जर हो चुका है, जिसके कारण मुख्य स्कूल बिल्डिंग को बंद कर दिया है। इस जर्जर हालत के कारण स्कूल को 50 मीटर दूर एक बाड़े में शिफ्ट किया है, जहां बच्चे टीनशेड के नीचे बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। वहीं, बाड़े के पास पशुओं का चारा भरा हुआ है और दीवार की ईंटें भी गिरी हुई हैं।
‘बच्चों को भैंसों के तबेले में पढ़ाया जा रहा’
आशुतोष रांका ने स्कूल की स्थिति को लेकर सरकार पर भी निशाना साधा है। उन्होंने लिखा, 'बच्चों को भैंसों के तबेले में पढ़ाया जा रहा है और यह रोकने के लिए भाजपा अपने गुंड़े भेज रही है।' इस स्थिति को उन्होंने शर्मनाक बताया है।
क्या बोले कांग्रेस नेता सचिन पायलट?
इस बीच, कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने गांव के स्कूल का दौरा करने पहुंची सीजेपी कार्यकर्ताओं के विरोध के मामले पर सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि, जनता, युवाओं और छात्रों में नाराजगी है, लेकिन सरकार इसे दबाने की कोशिश कर रही है। पायलट ने स्कूलों में पत्रकारों के प्रवेश, फोटो लेने और बिना अनुमति खबर प्रकाशित करने पर रोक के आदेश का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार स्कूलों की बदहाल स्थिति और जर्जर भवनों की हकीकत छिपाना चाहती है।