केरल का सीएम बनते ही सतीशन ने कई बड़े फैसलों पर एक्शन लेना शुरु कर दिया है। मुख्यमंत्री सतीशन ने कैबिनटे बैठक के बाद राज्य के लिए अहम घोषणाएं कीं। अब इस नई सरकार ने विवादों में चल रहे सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट को पूरी तरह से बंद करने का फैसला लिया है। फिलहाल इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण की अधिसूचना रद्द कर दी गई है।
सरकार ने परियोजना के विरोध में शामिल लोगों को राहत देते हुए अहम फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने आंदोलनकारियों पर दर्ज सभी मुकदमों को वापस लेने की अनुशंसा करने का निर्णय किया है। वहीं, युवाओं के हित में भी बड़ा कदम उठाया गया है। पब्लिक सर्विस कमीशन (PSC) की रैंक सूची की अवधि अब बढ़ाकर 30 नवंबर तक कर दी गई है, जिससे अभ्यर्थियों को अतिरिक्त अवसर मिल सकेगा।
सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट क्या है?
आपको बता दें कि, सिल्वर लाइन प्रोजेक्ट पिछली पिनराई विजयन सरकार की एक महत्वाकांक्षी रेल परियोजना थी। इसकी अनुमानित लागत करीब 64,000 करोड़ रुपये थी। पिछली सरकार ने दावा किया था कि यह प्रोजेक्ट केरल के दो छोरों (दक्षिण से उत्तर) को जोड़ने का काम करेगा। यह राज्य के विकास के लिए जरूरी है। इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 529.45 किलोमीटर थी। इस प्रोजेक्ट के तहत एक लम्बा सेमी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की तैयारी थी। वहीं, रेलवे बोर्ड ने इस प्रोजेक्ट को 17 दिसंबर 2019 को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। लेकिन कांग्रेस और भाजपा सहित कई विपक्षी दल और पर्यावरण प्रेमी इसका विरोध करते रहे हैं।
क्यों हो रहा था विरोध?
इस प्रोजेक्ट का विरोध करने वालों में भाजपा, कांग्रेस दल के नेता समेत पर्यावरण संरक्षणकर्ता शामिल हैं। विरोध प्रदर्शन करने वालों का कहना है कि इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। यह प्रोजेक्ट वेटलैंड्स , धान के खेत और केरल की पहाड़ियों होकर गुजरेगा, इसलिए इस प्रोजेक्ट का बुरा असर पर्यावरण पर देखने को मिलेगा। वहीं, इस प्रोजेक्ट से 20 हजार से लोग बेघर हो जाएंगे।