पश्चिम बंगाल में ममता बर्नजी बुरी तरह से हारने के बाद भी मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी आने वाले दिनों पार्टी का चुनाव चिन्ह खो सकते हैं। बता दें कि, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा को 50 से अधिक विधायकों का समर्थन प्राप्त है और वे पार्टी का चुनाव चिन्हें अपने पास रखना चाहते हैं।
रविवार को पीशी-भाईपो की बुलाई गई बैठक में सिर्फ 20 विधायक ही शामिल हुए है। कई नगर निकायों के करीब 100 टीएमसी पार्षदों ने इस्तीफा दे दिया है। ऐसे में कुछ नेता तो भाजपा के साथ बातचीत कर रहे हैं। कुछ लोग जैसे फिल्म निर्माता और पूर्व विधायक राज चक्रवर्ती , चुनाव में हार के बाद पूरी तरह से राजनीति छोड़ चुके हैं।
कुणाल घोष की अपील भी नहीं आ रही काम
यदि TMC के 80 विधायकों और 29 सांसदों में से आधे से ज्यादा (करीब 40-45 विधायक और 15-18 सांसद) अलग हो चुके हैं दो घास-फूल वाले चुनाव चिन्हें के लिए चुनाव आयोग से संपर्क करते हैं, तो यह ममता बनर्जी और उनके भतीजे के पार्टी पर दावे को खारिज करने लिए काफी हो सकता है।
इस सोमवार को कुणाल घोष ने TMC नेताओं से हाथ जोड़कर गुजारिश की कि वे डूबते जहाज को छोड़कर न भागें। लेकिन ऐसे मुश्किल समय में, उनके नेता को उन पर भी यह भरोसा नहीं है कि वे कोई लाइफबोट छीनकर कूद न जाएं।
पार्टी के अंदर चल रही है उथल-पुथल
चुनाव के हार के बाद ममता बनर्जी 'INDIA' मंच के जरिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) विरोधी गुट को फिर से मजबूत करने की कोशिश करेंगे। लेकिन पार्टी के भीतर की उथल-पुथल के कारण उनकी विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाने की संभावना है और विपक्ष की एकता की उनकी अपील तब कम असरदार करते हैं।