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UP में 'Gun Culture' पर High Court की तल्ख टिप्पणी, बाहुबलियों के लाइसेंस पर मांगी Report

By LSChunav | May 23, 2026

उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि सूबे में 10 लाख से ज्यादा शस्त्र लाइसेंसधारी हैं, उनमें से 6062 लोग दागी हैं, जिससे कोर्ट भी हैरान हो गए हैं। हाईकोर्ट ने उन बाहुबलियों की आपराधिक कुंडली और इन्हें सरकारी सुरक्षा का ब्योरा तलब किया है, जिनका नाम सरकारी हलफनामे में गुम है। इसमें अब्बास अंसारी, बृजभूषण सिंह , राजा भैया सहित कई लोग हैं।

आपको बता दें कि, यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने संतकबीर नगर निवासी जय शंकर की याचिका पर दिया है। पहले भी गन कल्चर से चिंतित कोर्ट ने प्रदेश में शस्त्र लाइसेंस के आवंटन, नवीनीकरण और नियमों की अनदेखी को लेकर मंडलवार जारी शस्त्र लाइसेंस की जानकारी मांगी थी।

कोर्ट ने लखनऊ जोन और लखनऊ कमिश्नरेट के इन लोगों की मांगी कुंडली

खान मुबारक, अजय प्रताप सिंह ऊर्फ अजय सिपाही, संजय सिंह सिंघला, अतुल वर्मा, मोहम्मद साहिब, सुधाकर सिंह, गुड्डू सिंह, अनूप सिंह, लल्लू यादव, बच्चू यादव, जुगनू वालिया ऊर्फ हरविंदर।

किन प्रभावशाली व्यक्तियों के लाइसेंसों की जांच के आदेश

आपको बता दें कि कोर्ट ने शस्त्र लाइसेंस की जांच के आदेश दिए गए हैं। रघुराज प्रताप सिंह (राजा भैया), धनंजय सिंह, सुशील सिंह, बृजभूषण शरण सिंह, विनीत सिंह, अजय मरहाद, सुजीत सिंह बेलवा, उपेंद्र सिंह गुड्डू, उदय भान इन सभी शस्त्र लाइसेंस की जांच करने के आदेश दिए हैं।

लाइसेंसी शस्त्रों का ढेर है, जिससे बना रहे दबदबा

यूपी के कई बाहुबली, उनके करीबी-रिश्तेदार और कुछ माफिया ने लाइसेंसी शस्त्रों की खेप ले रखी है। ये सिर्फ इसलिए जिससे उनका दबदबा कायम रहे और उनकी दहशत रहे। इसको वह अपने मान सम्मान से भी जोड़ते हैं।

जान का खतरा बताकर तमाम आपराधिक मामले दर्द होने के बाद एक व उससे अधिक लाइसेंसी शस्त्र ले लिए है। असल में हाईकोर्ट ने अब्बास अंसारी, बृजभूषण सिंह और राजा भइया समेत कई की आपराधिक कुंडली तलब की है।

सरकार ने दाखिल किए गए हलफनामे में बताया है कि प्रदेश में 10 लाख से अधिक शस्त्र लाइसेंस हैं, जिनमें 6062 दागी है। बता दें कि, इन पर आपराधिक केस दर्ज हैं। फिर भी इन्हें लाइसेंस मिले हैं।

कोर्ट की चेतावनी

अदालत ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए साफ कहा कि सभी जिलों के एसपी और पुलिस आयुक्त जब भी रिपोर्ट प्रस्तुत करें, तो वे लिखित रूप में यह सुनिश्चित करें कि किसी भी प्रकार की जानकारी को नहीं छिपाया गया है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर बाद में कोई तथ्य छुपाया हुआ पाया गया, तो संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत तौर पर जवाबदेह माना जाएगा। इसे ड्यूटी के प्रति जानबूझकर बरती गई गंभीर लापरवाही माना जाएगा।

क्या कहा कोर्ट ने?

हाईकोर्ट ने बताया कि हथियारों का सार्वजानिक प्रदर्शन भले ही दबदबा, ताकत और सुरक्षा का भ्रम पैदा करता हो पर यह अक्सर सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ सकता है। आम जनता में भय व असुरक्षा की भावना उत्पन्न कर सकता है। खुलेआम हथियार लेकर चलना भले ही आत्मरक्षा के नाम पर सही ठहराया जाए, लेकिन जब ये डराने-धमकाने का जरिया बन जाते हैं तो इनसे सुरक्षा नहीं, बल्कि खौफ पैदा होता है। ऐसा समाज जहां सिर्फ हथियारबंद लोग बलपूर्वक अपना दबदबा कायम रखते है, तो वह शांतिप्रिय नहीं हो सकता है। 
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