West Bengal Politics: बकरीद से पहले BJP का दांव पड़ा उलटा, 'गाय' पर मुसलमानों के इस कदम से मची खलबली

दिव्यांशी भदौरिया     May 25, 2026
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West Bengal Politics: बकरीद से पहले BJP का दांव पड़ा उलटा, गाय पर मुसलमानों के इस कदम से मची खलबली

पश्चिम बंगाल में बकरीद से पहले गाय की कुर्बानी को लेकर राजनीति तेज हो गई है, जहां मुस्लिम धर्मगुरुओं ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग कर बीजेपी को उसी के मुद्दे पर घेर लिया है। शुभेंदु अधिकारी के बयान के बाद, मुस्लिम समुदाय ने गाय खरीदने से इनकार कर दिया है, जिससे यह मामला राजनीतिक और आर्थिक दोनों रूप से जटिल हो गया है।

बकरीद का आने वाली है, इस समय बंगाल में इसको लेकर राजनीति से शुरु हो चुकी है। राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बकरीद पर गाय कुर्बानी न करने पर रोक लगाई है। जिसके बाद यहां की सबसे बड़ी मस्जिद इमाम, मौलाना शफीक कासमी से जब शुभेंदु अधिकारी के इस फैसले को लेकर पूछा गया, तो उन्होंने बड़े ही शांत और संयम रैवया को अपना लिया है। अब खबर आ रही है कि बंगाल के मुसलमान कोलकाता के बाजारो से गाय के खरीदने के लिए इनकार करने लगे हैं। मौलाना शफीक कासमी ने अपने मुसलमान भाईयो से अपील की है कि इस बार बकरीद पर शांति और सौहार्द बनाएं रखें। वहीं, बीफ का सेवन करने से बचें।


मुसलमानों के खेला दाव


इस बीच नखोदा मस्जिद से लेकर अजमेर शरीफ दरगाह तक, धर्मगुरुओं ने सरकार से अपील की है कि गाय को राष्ट्र पशु का दर्जा दिया जाए। इस प्रस्ताव को लेकर केंद्र सरकार पर कतराएंगी। गौरतलब है कि इस प्रकार की रणनीतियां सिर्फ गौ-रक्षकों के समूह और सरकार के नई उत्साही तत्वों को खुश करने के लिए किया जा रहा है। 


दिलीप घोष ने क्या कहा?


भारत में रहने वाला हर व्यक्ति संस्कृति को समझता है। जिस प्रकार नदियों में गंगा को विशेष दर्जा प्राप्त है, उसी तरह पशुओं में गाय का भी विशेष स्थान है। हर भारतीय इसका सम्मान करता है। जो लोग इस भावना को नहीं मानते, उनके साथ कानून के अनुसार निपटा जाएगा।


क्या है 1950 का सबसे पुराना कानून?


यह नियम केवल यहीं तक सीमित नहीं है। इसके तहत किसी भी निर्धारित पशु का वध बिना आधिकारिक अनुमति के नहीं किया जा सकता। इसके लिए संबंधित विभाग द्वारा जारी प्रमाणपत्र जरूरी होता है, जो यह पुष्टि करता है कि पशु वध के योग्य है। आमतौर पर यह प्रमाणपत्र नगर निकाय और पशु चिकित्सा अधिकारियों की जांच के बाद दिया जाता है। नियमों के अनुसार वही पशु इस प्रक्रिया के लिए मान्य माना जाता है जिसकी उम्र 14 वर्ष से अधिक हो, या जो गंभीर चोट, स्थायी शारीरिक अक्षमता अथवा असाध्य बीमारी के कारण पूरी तरह अक्षम हो चुका हो।


इकबाल अंसारी ने क्या कहा है?


यह मुद्दा हमारे देश और हमारे देश के कानूनों से जुड़ा है। हम गायों का सम्मान करते हैं, और पूरा देश उनका सम्मान करता है। हिंदू धर्म में गाय को 'गौ माता' का दर्जा दिया गया है और उसे मां माना जाता है। यह एक अच्छी बात है, और सभी को इसका सम्मान करना चाहिए। अगर हमारा हिंदू पड़ोसी गाय को 'गौ माता' कहता है, तो हमारा भी यह फर्ज बनता है कि हम भी ऐसा ही करें। गाय की कुर्बानी को लेकर कोई लिखित नियम नहीं है और ऐसा होना भी नहीं चाहिए क्योंकि अल्लाह और पैगंबर ने इसकी मनाही की है। अल्‍लाह के रसूल ने मना किया है कि गाय का दूध फायदेमंद और घी दवा है। हमारी गुजारिश है कि सभी गाय का सम्‍मान करें।


कलकत्ता हाई कोर्ट ने की एंट्री


इस बीच, कलकत्ता हाई कोर्ट ने भी एंट्री कर ली है।  1950 के कानून का हवाला देकर निजी रुप से गायों के वध पर रोक लगाने का फैसला 'अधिकारी सरकार' लेगी। ईद पर मावेशी न खरीदने का फैसला मुसलमान का है। यह आर्थिक तबाही का सबब न बन जाएं। बता दें कि, इस मामले में गायों, बैलों, बछड़ों, सांड़ों और भैसों के वध पर रोक लगाई गई थी। कोर्ट ने यह रुख अपनाया कि जानवरों का वध नगर निगम द्वारा अनुमोदित अधिकृत बूचड़खानों में किया जा सकता है। 


इससे पहले भी बंगाल में गाय पर राजनीति हो चुकी है। 


बंगाल में नहीं बंद हुई थी गोहत्या


आजादी के बाद से 1960 के दशक से लेकर बाद में भी गाय पर राजनीति काफी देखने को मिली है। साल 2014 में केंद्र में भाजपा आई तब से गाय की सुरक्षा के लिए काफी अपील हुआ और सुरक्षा को लेकर काफी राजनीति हुई है। जिसके बाद से कई जगहों से गाय की हत्या को लेकर काफी हत्याएं हुई। लेकिन बंगाल में इस चलन को कोई बंद नहीं कर पाया, यहां पर काफी समय खुलेआम बीफ परोसे जाने लगा और होटल में सर्व किया जाने लगा। अधिकृत बूचड़खानों में गाय-बौलों की खूब हत्याएं हुई। अब पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की सरकार है, इस पर अब बैन लग चुका है।