दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा को लगा बड़ा झटका, अदालत ने दिल्ली दंगे को लेकर दिया जांच का आदेश

दिल्ली में भाजपा की सरकार है नियुक्त है। इस बीच खबर आई है कि दिल्ली के कानून मंत्री कपिल मिश्रा को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली दंगे से जुड़े केस में अदालत ने कपिल मिश्रा के खिलाफ जांच के आदेश दिए।
दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस को राज्य के कानून मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा की 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में कथित भूमिका की आगे की जांच करने का आदेश दिया, जिसमें कहा गया कि यमुना विहार निवासी द्वारा दर्ज की गई शिकायत में एक संज्ञेय अपराध बनाया गया है। बता दें कि, उत्तर पूर्वी दिल्ली में साल 2020 में दंगे हुए थे, जिसमें 53 लोग मारे गए थे और कई लोग घायल भी हुए थे।
अदालत ने दिए जांच के आदेश
अदालत ने कहा कि दिल्ली पुलिस की तरफ से उपलब्ध कराई गई सामग्रियों के आधार पर पता चलता है कि कपिल मिश्रा की मौजूदगी कर्दम पुरी इलाके में थी और एक संज्ञेय अपराध हुआ है जिसकी जांच होगी। जानकारी के लिए बता दें कि, करावल नगर से विधायक है और कानून मंत्री है।
राउज एवेन्यू कोर्ट में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने मंगलवार को कहा, "पहली घटना के संबंध में आगे की जांच शुरू की जाए क्योंकि शिकायतकर्ता ने संज्ञेय अपराध का खुलासा किया है। कपिल मिश्रा के खिलाफ हम आगे की जांच का निर्देश दे रहे हैं क्योंकि हमें प्रथम दृष्टया लगता है कि संज्ञेय अपराध है। कपिल मिश्रा को इलाके में देखा गया था।"
यह आदेश यमुना विहार निवासी मोहम्मद इलियास द्वारा अगस्त 2024 में दायर एक आवेदन पर पारित किया गया था, जिसमें कपिल मिश्रा और तीन भाजपा नेताओं - मुस्तफाबाद विधायक मोहन सिंह बिष्ट और पूर्व विधायक जगदीश प्रधान और सतपाल सांसद सहित पांच अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी।
पुलिस ने अदालत को बताया कि प्राथमिकी में मिश्रा की भूमिका की जांच की गई थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत से कहा था, डीपीएसजी (दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट) समूह की चैट से पता चलता है कि चक्का जाम की योजना पहले से बनाई गई। पुलिस की जांच से पता चला कि मिश्रा पर दोष मढ़ने की एक योजना बनाई।