Supreme Court में वकील बनीं Mamata Banerjee, CJI से बोलीं- चुनाव से पहले बंगाल को टारगेट किया जा रहा

दिव्यांशी भदौरिया     Feb 04, 2026
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Supreme Court में वकील बनीं Mamata Banerjee, CJI से बोलीं- चुनाव से पहले बंगाल को टारगेट किया जा रहा

पश्चिम बंगाल मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद दलीलें पेश कर रही हैं। उन्होंने इस प्रक्रिया को चुनाव से पहले राज्य को निशाना बनाने की एक राजनीतिक साजिश बताया और आरोप लगाया कि जल्दबाजी में सिर्फ मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं।

इस साल पश्चिम बंगाल में चुनाव होने वाले हैं। इस दौरान राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई जा रही है। आपको बता दें कि ममता बनर्जी ये केस खुद लड़ रही है। सुप्रीम कोर्ट में ममता की दलील जारी है। ममता बनर्जी ने कहा कि बंगाल को चुनाव के पहले टारगेट किया गया। सिर्फ तीन महीने में यह किया जाने की कोशिश हो रही है। एसआईआर प्रक्रिया में सिर्फ नाम काटे जा रहे हैं। उन्होंने पूछा कि इतनी जल्दी क्या है।


आपको बताते चलें कि, सुनवाई के समय CJI ने कहा कि 19 जनवरी को कपिल सिब्बल ने प्रक्रिया से जुड़ी कठिनाइयों को विस्तार से समझाया था। ऐसे में कोर्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि कोई भी निर्दोष नागरिक सूची से बाहर न रह जाए।  CJI ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हर समस्या का समाधान संभव है ताकि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय न हो। इसके बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बोलना शुरु किया और कहा कि उन्हें बेंच के प्रति पूरा सम्मान है। उन्होंने आरोप लगाया कि न्याय कई बाद दरवाजे के पीछे रोता हुआ दिखाई देता है और उन्होंने इस मुद्दे पर कई बार चुनाव आयोग को पत्र भी लिखा है। 


सीजीआई ने पूछा ये सवाल


इस सुनवाई के दौरान सीजीआई ने कहा कि पश्चिम बंगाल राज्य ने भी अपने अधिकार से एक रिट पिटीशन फाइल की है। राज्य का केस लड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट में सबसे अच्छे वकील हैं। मिस्टर दीवान, मिस्टर सिब्बल और सबसे अच्छे लोग हमारी मदद के लिए मौजूद हैं। इस पर ममता बनर्जी ने कहा कि मैं खुद वहां के हालात के बारे में कोर्ट को बताऊंगी। क्योंकि मैं उस राज्य का प्रतिनिधित्व कर रही हूं। ममता ने कहा कि मतदाताओं से आधार के साथ ही अतिरिक्त प्रमाण पत्र मांगे जा रहे हैं, जबकि अन्य राज्यों में निवास या जाति प्रमाण पत्र तक मान्य नहीं किए जा रहे।


ममता ने लगाए आरोप


उन्होंने कहा कि चुनाव से ठीक पहले इतनी बड़ी व्यवस्था को जल्दबाजी में लागू किया गया, जबकि आमतौर पर ऐसी प्रक्रियाएं वर्षों में पूरी होती हैं। ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि इस दबाव और कथित उत्पीड़न से बीएलओ मानसिक तनाव का शिकार हुए। उन्होंने पूरे प्रकरण को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि इसके जरिए पश्चिम बंगाल को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।