UP: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का सनसनीखेज दावा, 'Police जेल में जहर की सुई लगा सकती है'

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने खुद पर लगे आरोपों को निराधार बताते हुए पुलिस हिरासत में जहर की सुई लगाकर हत्या किए जाने की आशंका जताई है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को एपस्टीन फाइल से देश के बड़े लोगों के नाम दबाने और जनता का ध्यान भटकाने की एक साजिश करार दिया है।
हालिए में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर कई सारे आरोप लगाए गए थे। दरअसल, अविमुक्तेश्वरानंद ने उन पर लगाए सभी आरोपों को झूठा और निराधार बताया है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपनी हत्या की आशंका भी जताई है। गुरुवार को वह केदार घाट स्थित मठ में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। अग्रिम जमानत याचिका दायर करने के मुद्दे पर शंकराचार्य ने कहा कि आश्रम से जुड़े लोगों को यह डर सता रहा है कि पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर जेल भेज सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि वहां उनके साथ साजिश के तहत जहरीला इंजेक्शन देकर जान से मारने जैसी घटना भी घटित की जा सकती है।
अविमुक्तेश्वरानंद अग्रिम जमानत दाखिल करने के पक्ष में नहीं थे
उन्होंने हाल ही में कहा है कि वह स्वयं अग्रिम जमानत दाखिल करने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन पीठ से जुड़े लोगों की भावनाओं के आधार पर यह निर्णय लिया गया। उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं। एक आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति झूठी कहानी गढ़कर लोगों के सामने रख देता है और उसी आधार पर पूरा घटनाक्रम चलने लगता है।
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि जांच टीम अपना काम कर रही है, लेकिन आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा प्रेस वार्ता कर जांच संबंधी रिपोर्ट मीडिया के सामने प्रस्तुत की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जांच टीम की रिपोर्ट एक हिस्ट्रीशीटर सार्वजनिक कर रहा है तो पुलिस क्या कर रही है।
शीश महल पर क्या बोले अविमुक्तेश्वरानंद
उन्होंने आगे कहा कि कानून पॉक्सो एक्ट से संबंधित रिपोर्ट सामान्यत: सार्वजनिक नहीं की जाती है। अगर कोई जानकारी शेयर की जाती है तो वह पुलिस विभाग की तरफ से होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि- ऐसा प्रतीत होता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने शिकायतकर्ता को ही अपना स्थायी प्रवक्ता बना लिया है। मठ से जुड़ी ‘शीश महल’ जैसी चर्चाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि इस समय जिसे जो कहना है, वह कह रहा है। उन्होंने कहा कि किसी कक्ष में शीशा लगा होना बुराई नहीं है। यदि कमरा पारदर्शी है तो बाहर का व्यक्ति अंदर देख सकता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है।
छिपाने वाली कोई बात नहीं
पांच मंजिला भवन के संबंध में अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह कोई छिपाने वाली वास्तु नहीं है, जिसे जेब में रखकर छिपाया जा सके। उन्होंने कहा कि यदि कोई आश्रम को ऊपर तक देखना चाहता है तो उसे बिना कैमरे के पूरा परिसर देखने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि, यहां छात्र पढ़ते और निवास करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कैमरे के साथ प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती।
आगे उन्होंने कहा कि- भारत के कानून, न्यायपालिका और सरकारों को जितना बड़ा दुरुपयोग हो सकता है, यह एक दर्शक की तरह देखने को मिल रहा है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि एपस्टीन फाइल में देश के कई बड़े लोगों के नाम शामिल हैं और उसे दबाने के लिए ही उनकी बदनामी कर जनता का ध्यान भटकाया है।



