Uttarakhand SIR Revision: 19 लाख मतदाताओं को नोटिस, फर्जी Documents पर होगी सख्त कार्रवाई

दिव्यांशी भदौरिया     Jul 29, 2026
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Uttarakhand SIR Revision: 19 लाख मतदाताओं को नोटिस, फर्जी Documents पर होगी सख्त कार्रवाई

उत्तराखंड चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में विसंगतियों को दूर करने हेतु 19 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी कर व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य की है। एसआईआर प्रक्रिया के तहत गलत जानकारी देने पर भारतीय न्याय संहिता के तहत दंडात्मक कार्रवाई और जेल का कड़ा प्रावधान किया गया है। यह प्रशासनिक निर्णय चुनावी डेटा की पारदर्शिता और शुद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रेरित है।

उत्तराखंड में चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान आने वाली विसंगतियों पर संख्त रुख अपनाया है। दरअसल, राज्य में 19.04 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी कर निर्धारित तिथि पर दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा गया है। नोटिस में बताया गया है कि गलत जानकारी देने वाले मतदाताओं को जेल के साथ ही जुर्माना भी हो सकता है। 

चुनाव आयोग ने एसआईआर के जरिए उन सभी मतदाताओं को नोटिस भेजा है, जो कि एसआईआर प्रपत्र में नाम, आयु, रिश्तेदार की आयु संबंधी विसंगतियां सामने आईं हैं। 

जारी किए गए नोटिस में मतदाता का नाम, इपिंक नंबर, विधानसभा,भाग संख्या, क्रम संख्या और पता लिखा हुआ है। इस नोटिस में यह भी कहा गया है कि मतदाताओं को ये नोटिस किस कारण से आया है। स्पष्ट किया गया है कि मतदाता ने अपने रिश्तेदार के साथ जो भी जानकारी उपलब्ध कराई है, वह पिछले एसआईआर के मानकों के हिसाब से ठीक नहीं है। इस नोटिस में सुनवाई की तिथि, समय और स्थान भी बताया गया है। 


गलत जानकारी देने पर होगी कार्रवाई

चुनाव आयोग ने कहा है गलत जानकारी देने पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा-217 के तहत कार्रवाई होगी। असल में ये धारा किसी लोक सेवक (सरकारी अधिकारी या पुलिस) को नुकसान पहुंचाने के इरादे से उसे जानबूझकर झूठी या गलत सूचना देने से संबंधित है। अगर कोई व्यक्ति यह जानते हुए कि सूचना झूठी है, किसी सरकारी अधिकारी को ऐसी जानकारी देता है, जिससे वह अधिकारी किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान या परेशानी पहुंचाए तो उसे एक साल की कैद, 10 हजार रुपये जुर्माना या दोनों हो सकता है।


इसके अतिरिक्त लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा-31 के तहत भी एक्शन लिया जा सकता है। यह धारा झूठी घोषणाएं करने से संबंधित है, जिसके तहत मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के लिए लिखित रुप से गलत जानकारी देना एक दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर एक साल तक जेल, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।


आपके दिए दस्तावेजों की जांच करेगा आयोग

मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास ने बताया कि नोटिस की सुनवाई के दौरान दिए गए बयानों के समर्थन में मतदाता जो भी दस्तावेज देंगे, उनकी आयोग स्वतंत्र रुप से जांच करेगी। जैसे कि किसी ने 10वीं का प्रमाणपत्र दिया है, तो संबंधित बोर्ड से उसका सत्यापन कराया जाएगा। कोई भी दस्तावेज झूठा, मनगढ़त, गलत पाया जाता है तो बीएनएस और लोक प्रतिनिधत्व अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।