हिमाचल प्रदेश में जल्द ही 30 अप्रैल 2026 को पंचायत चुनाव होने वाले हैं। विभाग की तरफ से हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायलय में 10 जनवरी तक पुनर्गठन की अधिसूचना को जारी करने को कहा था। अब एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक अधिसूचना जारी नहीं हो सकी है, जिसके कारण चुनाव की पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है। आमतौर पर पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद बदलाव किए जाते हैं, फिर आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं तथा उनके निस्तारण के बाद अधिसूचना जारी होती है, जिसमें 20 दिनों से भी अधिक समय लग जाता है। इस देरी के चलते पुनर्गठन की पूरी प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है।
प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं की त्रिस्तरीय प्रणाली में तीन स्तर पर चुनाव होने हैं, जिसमें पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद शामिल है। प्रदेश के 12 जिला परिषदों में कुछ में पुनर्गठन होना है।
दिसंबर महीने में पंचायत राज विभाग ने जिला परिषदों के पुनर्गठन से संबंधित पहले जारी की गई सभी अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया था। हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पंचायतों के पुनर्गठन और आरक्षण रोस्टर को 28 फरवरी तक जारी किया जाना अनिवार्य है, वहीं पंचायतों और शहरी निकायों के चुनाव 30 अप्रैल से पहले कराने के आदेश भी दिए गए हैं।
एक ब्लाक क्षेत्र को एक ही जिला परिषद वार्ड में रखा गया
पहले पंचायती राज व्यवस्था में एक ही ब्लॉक का क्षेत्र दो या तीन अलग-अलग जिला परिषद वार्डों में शामिल था। इस व्यवस्था में संशोधन करते हुए एक ब्लॉक के पूरे क्षेत्र को एक ही जिला परिषद वार्ड के अंतर्गत लाने का निर्णय लिया गया। इस बदलाव को लेकर शिमला जिले के जुब्बल क्षेत्र से संबंधित मामला पहले मंडलायुक्त के समक्ष और बाद में प्रदेश के उच्च न्यायालय तक पहुंचा। इसके बाद पंचायती राज विभाग ने दिसंबर माह में इस विषय से जुड़ी सभी अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया।
क्या कहा राज्य चुनाव आयोग ने?
पंचायतों और शहरी निकायों के पुनर्गठन और आरक्षण रोस्टर को न्यायालय के आदेश अनुसार 28 फरवरी तक किया जाना है। जिला परिषद वार्डों में बदलाव को लेकर 10 जनवरी तक अधिसूचना जारी करने को कहा, लेकिन अभी तक नहीं की गई है।
-सुरजीत सिंह, सचिव, राज्य चुनाव आयोग।