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JDU में RCP सिंह की 'घर वापसी' तय? नीतीश को बताया 'अभिभावक', जानिए Inside Story

By LSChunav | Jan 17, 2026

इस समय में बिहार के सियासी गलियारों में बस एक सवाल गूंज रहा है, वो है- क्या पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह (राम चंद्र प्रसाद सिंह) फिर से जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का दामन थामने वाले हैं? सीएम नीतीश कुमार के साथ एक सार्वजानिक कार्यक्रम में दिखने और उनके प्रति नरम रुख अपनाने के बाद अटकलों को और बल मिल गया है। एक समय नीतीश के सबसे भरोसेमंद और जेडीयू के 'नंबर दो' रहे आरसीपी सिंह ने अब सीएम को अपना अभिभावक बताया है। इसके बाद से ही सवाल उठने लगे है कि क्या जेडीयू में वापसी कुर्मी नेता आरसीपी सिंह की मजबूरी बन गई है? क्या नीतीश कुमार को आरसीपी सिंह का जरुरत है, आइए आपको बताते हैं।

क्या दही-चूड़ा भोज ने कम कर दीं नीतीश से आरसीपी सिंह की दूरियां?

हाल ही में पटेल सेवा संघ की ओर से आयोजित 'दही-चूड़ा भोज' में नीतीश कुमार और आरसीपी सिंह दोनों शामिल हुए। दोनों नेता अलग-अलग समय पर पहुंचे, हालांकि कार्यक्रम के बाद आरसीपी सिंह के बयानों ने सबको चौंका दिया है। जब मीडिया ने उनसे जेडीयू में वापसी पर सवाल किया, तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, 'जल्द ही पता चल जाएगा'। इसके साथ ही उन्होंने नीतीश कुमार को 'भारत रत्न' देने की मांग का भी समर्थन किया और नीतीश कुमार को अपना अभिभावक बता दिया।

25 साल का पुराना रिश्ता है नीतीश-आरसीपी सिंह

 आपको बताते चलें कि आरसीपी सिंह और नीतीश कुमार का रिश्ता करीब ढाई दशक यानी 25 साल पुराना है। मूल रुप से नालंदा के मुस्तफापुर के रहने वाले आरसीपी सिंह, नीतीश कुमार की ही तरह 'कुर्मी' समुदाय से आते हैं। वर्ष 1984 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रहे सिंह की मुलाकात नीतीश कुमार से 1996 में हुई थी।

नीतीश कुमार उनकी कार्यक्षमता से इतने प्रभावित हुए कि पहले उन्हें रेल मंत्रालय में विशेष सचिव बनाया और बाद में बिहार के मुख्यमंत्री बनने पर अपना प्रधान सचिव नियुक्त किया। वर्ष 2010 में वीआरएस लेने के बाद आरसीपी सिंह ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। इसके बाद वे राज्यसभा पहुंचे और आगे चलकर जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। कुल मिलाकर, नीतीश कुमार के संरक्षण में रहते हुए आरसीपी सिंह को जेडीयू में लगातार महत्वपूर्ण अवसर और ऊँचे पद मिलते रहे।

जेडीयू छोड़ने के बाद आरसीपी सिंह की राजनीति पर भी संकट आया

गौरतलब है कि जब आरसीपी सिंह जेडीयू में रहे, उनका रुतबा बना रहा। लेकिन नीतीश कुमार के साथ रिश्तों में खटास आई तो उन्होंने जेडीयू से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद वे भाजपा में शामिल हुए, हालांकि उन्हें वहां अहमियत और भरोसा नहीं मिला जिसकी उन्हें उम्मीद थी। भाजपा में भाव न मिलता देख आरसीरी सिंह ने बिहार में अपनी पार्टी बना लीं। जब हकीकत का अंदाजा लगा तो उन्होंने प्रशांत किशोर की जन सुराज में अपनी पार्टी का विलय कर दिया। बिहार चुनाव में आरसीपी सिंह ने नीतीश की पार्टी के प्रत्याशी के खिलाफ अस्थावां सीट से अपनी बेटी लता सिंह को मैदान में उतारा। लेकिन चुनाव में लता सिंह को करारी हार का सामना करना पड़ा। उनकी जमानत भी जब्त हो गई।

ऐसे में माना जा रहा है कि बदलते हुए राजनीतिक समीकरणों के बीच उनकी जेडीयू में वापसी को 'घर वापसी' के तौर पर देखा जा रहा है। 
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