प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पंजाब दौरा दूसरी बार हो रहा है। पंजाब में दलित राजनीति का गढ़ कहे जाने वाला दोआबा क्षेत्र में पीएम मोदी साढ़े पांच महीने में दूसरा बीजेपी का चुनावी रणनीति को धार देगा। आज शाम की पीएम मोदी जालंधर पहुंच जाएंगे। यहां पर रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित 5500 करोड़ रुपये की सौगात पंजाबियों को मिलेगी। इससे पहले मोदी जी फरवरी में पंजाब आए थे।
पंजाब में सियासी वजूद मजबूत करना चाहती है भाजपा
गौरतलब है कि भाजपा लंबे समय से पंजाब अपनी राजनीति वजूद को मजबूत करने में लगी है। वहीं एकला चलो की नीति के तहत साल 2022 (विधानसभा चुनाव) और 2024 (लोकसभा चुनाव) में भाजपा अकेली ही चुनाव रण में उतरी थी। साल 2027 में विधानसभा चुनाव में भी अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर ही भाजपा । इसी के मद्देनजर दोआबा क्षेत्र में भाजपा का सबसे ज्यादा फोकस है।
वहीं, पंजाब के माझा क्षेत्र की बात करें तो यहां भाजपा पठानकोट, मृतसर इत्यादि शहरी क्षेत्रों में हिंदू वोट बैंक पर अपने खासे प्रभाव का दावा करती है लेकिन यहां ग्रामीण इलाकों में भाजपा का कैडर कमजोर है। इधर मालवा क्षेत्र में भाजपा की राजनीतिक स्थिति जटिल और चुनौतीपूर्ण रही है। लेकिन, पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह, पंजाब भाजपा के नए अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों व केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू समेत अन्य नेता इसी क्षेत्र से ताल्लुक रखते हैं।
दोआबा पर इतना फोकस क्यों?
दरअसल, दोआबा एक संवेदनशील राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है। वैसे यहां पर सबसे बड़ा वोट बैंक लगभग 37 प्रतिशत दलितों का है। यह इलाका सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से भी प्रभावशाली माना जाता है।
यहां पर 23 विधानसभा सीटों का क्षेत्र है, सभी राजनीतिक दलों का सबसे बड़ा फोकस यहीं होता है। वैसे चुनाव में इस क्षेत्र में दलित वोटबैंक निर्णायक फैक्टर बनता है इसलिए यहां आठ विधानसभा सीटें अनुसूचित जाति के आरक्षित हैं।