यूपी सियासत में तीखा टकराव: अखिलेश के निशाने पर ब्रजेश पाठक, डिप्टी सीएम ने अनोखे अंदाज में किया जवाबी हमला

दिव्यांशी भदौरिया     May 31, 2026
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यूपी सियासत में तीखा टकराव: अखिलेश के निशाने पर ब्रजेश पाठक, डिप्टी सीएम ने अनोखे अंदाज में किया जवाबी हमला

जब पाठक ने पीडीए पर सवाल किया तो कश्यप ने जवाब दिया, सपा का पीडीए सामाजिक न्याय का फार्मूला नहीं बल्कि लोकतंत्र की आड़ में में एक राजनीतिक घराने जैसा व्यवहार करने और पिछले वर्ग के कल्याण की आड़ में केवल एक जाति के लिए काम करने का तरीका है। यह राजनीतिक अनोखी है।

इसमें कोई दोहराएं नहीं हैं कि यदि आप राजनीति में और आपके नाम की चर्चा न हो, तो राजनीति में होने से आपका यहां बेकार है। यदि आप राजनीतिक विरोधियों के निशाने पर नहीं रहते हैं, उन्हें अपने ऊपर बोलने के लिए मजबूर करते ही देते हैं। दरअसल, इस समय यूपी की राजनीति में ऐसा ही हो रहा है। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने जैसे इन परिस्थितियों को गांठ बांध लिया है। वे हमेशा राजनीतिक विरोधियों के निशाने पर रहते हैं।

असल में,  पाठक पत्रकार की भूमिका में सवाल-जवाब का सिलसिला शुरू किया और इसी दौरान अपने मंत्रिमंडल में पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप से चर्चा करते हुए समाजवादी पार्टी, उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव और पीडीए रणनीति पर तीखा हमला बोला। उनकी टिप्पणी सीधे विपक्ष के राजनीतिक एजेंडे को चुनौती देने वाली मानी गई।

इतना ही अखिलेश यादव ने ब्रजेश पाठक को बेकार और नाकाम तक कह दिया है। इस दौरान पाठक ने सिर्फ अखिलेश पर निशाना साधा है बल्कि उन्हें मिर्ची लगे तो मैं क्या करूं.... कहते हुए खुद की आगे की सियासी खेल शुरु कर दिया।


लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश में सफलता हासिल की

नरेंद्र कश्यप पिछड़े वर्गों के कल्याण के कार्यों से जुड़े विभाग के मंत्री हैं। अखिलेश यादव का पीडीए फॉर्मूला पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों यानी के मुस्लिमों के वोटों के योग पर बना है। इसी के आधार पर उन्हें साल 2024 सफलता हासिल हुई है।

जब पाठक ने पीडीए पर सवाल किया तो कश्यप ने जवाब दिया, सपा का पीडीए सामाजिक न्याय का फार्मूला नहीं बल्कि लोकतंत्र की आड़ में में एक राजनीतिक घराने जैसा व्यवहार करने और पिछले वर्ग के कल्याण की आड़ में केवल एक जाति के लिए काम करने का तरीका है। यह राजनीतिक अनोखी है।

इतना ही नहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ब्रजेश पाठक को नाकाम तक कह दिया है। कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के रुप में ब्रजेश पाठक बेकार साबित हुए हैं। इसलिए पत्रकार बन गए हैं। छात्र राजनीति से राजनेता बने पाठक ने अखिलेश के बयान को यह कहते हुए तुरंत लपका कि सपा प्रमुख ने खलिहर बताकर पत्रकारों का अपमान किया है।


इतना ही नहीं, उन्होंने पं. दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ. राममनोहर लोहिया के राजनेता होने के बाद भी समय पर पत्रकारिता करने, लिखने-पढ़ने के गुण का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव पर नया हमला बोल दिया है।


उन्हें मिर्ची लगी तो मैं क्या करूं

इसके बाद ब्रजेश पाठक ने लिखा कि संवाद सनातन धर्म का प्रमुख गुण है, जिसका अखिलेश अपमान कर रहे हैं। आगे लिखा कि स्वास्थ्य मंत्री के रूप में वह यथासंभव बेहतर काम कर रहे हैं। एक राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में संवाद की परंपरा आगे बढ़ा रहे हैं, उन्हें मिर्ची लगे तो मैं क्या करूं....! निश्चित रूप से पाठक की नई टिप्पणी पर भी सपा मुखिया कुछ न कुछ जरूर बोलेंगे। 


संवाद के दावे की आड़ में 2027 को लेकर नई सियासी निशानेबाजी की राजनीति शुरु हो चुकी है। ये चुनाव तक यूं ही चलती रहेगी पता नहीं, लेकिन पाठक ने चर्चा के केंद्र में आकर साबित कर ही दिया है कि उन्हें राजनीति दांव-पेंच अच्छे से आते हैं।