CM Bhupendra Patel से VHP की शिकायत के बाद Gujarat की दिवाली पत्रिका में हुआ बड़ा बदलाव

गुजरात सरकार ने अपनी वार्षिक दिवाली पत्रिका गुजरात दीपोत्सवी अंक के ऑनलाइन संस्करण से कवि अजीज टंकारवी की विवादित कविता हटा दी है। विश्व हिंदू परिषद ने आरोप लगाया था कि इसमें भगवान राम और संत मीराबाई को लेकर आपत्तिजनक संदर्भ हैं। वीएचपी के कड़े विरोध के बाद सरकार ने इसे हटाकर प्रकाश जलाल की कविता शामिल कर दी।
हाल ही में गुजरात सरकार ने अपनी वार्षिक दिवाली पात्रिका के ऑनलाइन संस्करण से एक कविता हटाई है। विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने आरोप लगाया था कि कविता में भगवान राम और भक्ति संत मीराबाई को लेकर "आपत्तिजनक" संदर्भ दिए गए हैं। बता दें कि, यह जानकारी वीएचपी के एक नेता ने दी है।
बता दें कि, कवि अजीज टंकारवी की इस कविता को राज्य के सूचना एवं प्रसारण विभाग की तरफ से हर साल दिवाली पर प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'गुजरात दीपोत्सवी अंक' के ऑनलाइन संस्करण से हटा दिया गया है। इसके जगह कवि प्रकाश 'जलाल' की कविता 'जोइए' को शामिल किया गया है।
वीएचपी ने अधिकारियों पर की सख्त कार्रवाई की मांग
23 अक्तूबर 2026 को वीएचपी ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को पत्र लिखकर कविता को तुरंत हटाने की मांग की थी। संगठन ने इसके लेखक और कविता को मंजूरी देने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की थी। इसके बाद गुजरात वीएचपी के प्रवक्ता हितेंद्रसिंह राजपूज ने पुष्टि की कि टंकारवी की कविता को बदल दिया गया है।
राजपूत ने कहा, "हमें खुशी है कि राज्य सरकार ने हमारी मांग पर तुरंत कार्रवाई की और दिवाली पत्रिका से उस विवादित कविता को हटा दिया।" वीएचपी की अहमदाबाद क्षेत्र इकाई के सचिव अश्विन पटेल ने अपने पत्र में इस साल की पत्रिका के पृष्ठ 389 पर प्रकाशित कविता पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें भगवान राम और मीराबाई को लेकर आपत्तिजनक संदर्भ हैं, जिससे हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
गुजराती दीपोत्सवी अंक के ऑनलाइन संस्करण को लेकर मचा था बवाल
वहीं, संगठन ने कहा कि सरकारी प्रकाशन में ऐसी कविता को शामिल करना विशेष रुप से चिंताजनक हैं, क्योंकि दिवाली भगवान राम के 14 साल का वनवास पूरा करने के बाद अयोध्या लौटने से संबंधित जुड़ा त्योहार है।
वीएचपी ने कविता को मंजूरी देने वाली अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांगी की। संगठन ने यह भी कहा कि सरकारी प्रकाशनों में किसी लेखक की रचना शामिल करने से पहले लेखन समीक्षा करना बेहद जरुरी है।
इसके अतिरिक्त, संगठन ने मांग की कि भविष्य में सरकारी प्रकाशनों में ऐसे लेखकों की रचनाएं शामिल की जाएं, जिनका देश, धर्म और संस्कृति के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण हो।



