'क्या तमिलनाडु के Finance Minister इंग्लैंड के राजा हैं?', Madras High Court ने Mary Wilson को लगाई कड़ी फटकार

दिव्यांशी भदौरिया     Aug 29, 2026
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क्या तमिलनाडु के Finance Minister इंग्लैंड के राजा हैं?, Madras High Court ने Mary Wilson को लगाई कड़ी फटकार

मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु के वित्त मंत्री की पेशी से छूट की याचिका को खारिज करते हुए विधि के शासन की सर्वोच्चता को रेखांकित किया है। अदालत की यह टिप्पणी कि जनप्रतिनिधि कानून से ऊपर नहीं हैं, लोकतांत्रिक जवाबदेही और न्यायिक निष्पक्षता के महत्व को दर्शाती है। मद्रास हाई कोर्ट, तमिलनाडु राजनीति, कानूनी प्रक्रिया, पेशी से छूट।

इस बीच, मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु के वित्त मंत्री मैरी विल्सन को पुडुचेरी की कोर्ट में पेश होने से छूट मांगने पर कड़ी फटाकर लगाई है। कोर्ट ने कहा कि वित्त मंत्री इंग्लैंड के राजा नहीं है, जो अदालत में व्यक्तिगच रुप से उपस्थित होने से छूट मांग सके।

असल में तमिलनाडु के वित्त मंत्री और टीवीके नेता मैरी विल्सन पर 2022 में अपने भाई और भाभी के साथ मारपीट करने का आरोप है। इस दौरान मंत्री ने इस मामले को लेकर पुडुचेरी की निचली अदालत में पेश न होने की अनुमति मांगते हुए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी।

सुनवाई के समय विल्सन के वकील ने तर्क दिया है कि राज्य विधानसभा का सत्र चल रहा है, इसलिए उन्हें पेशी में छूट दें।


क्या वो इंग्लैंड के राजा हैं?

बता दें कि, अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति लक्ष्मीनारायण ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने पूछा कि क्या तमिलनाडु के वित्त मंत्री मैरी विल्सन इंग्लैंज के राजा हैं, जो कोर्चट में पेश नहीं हो रहे है?

न्यायमूर्ति लक्ष्मीनारायणन ने पूर्व उदाहरण देते हुए कहा कि पी.वी. नरसिम्हा राव ने भी प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए अदालत में उपस्थित होकर कानूनी प्रक्रिया का सामना किया था, इसलिए जनप्रतिनिधि कानून से ऊपर नहीं।

इतना ही नहीं, जब कोर्ट ने सवाल किया कि मैरी विल्सन मंत्री बनने से पहले अदालत में पेश हो चुके हैं, तो क्या मंत्री बनने के बाद वह अदालत में पेश होने से इनकार कर सकते हैं? हाई कोर्ट ने मंत्री के वकील से कहा कि वह अदालत को उस तारीख की जानकारी दें, जब विल्सन पुडुचेरी की अदालत में पेश होंगे।

वहीं वकील ने कोर्ट को सूचित करते हुए मामले में एक नई चार्जशीट दाखिल की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मंत्री 31 अगस्त के बाद अदालत में उपस्थित हो जाएंगे और याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। अदालत ने उनकी बात स्वीकार की है और याचिका लेने की इजाजत दे दी।