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Bengal Politics के 'चाणक्य' Mukul Roy का निधन, TMC-BJP के रणनीतिकार ने ली अंतिम सांस

By LSChunav | Feb 23, 2026

पश्चिम बंगाल से बेहद ही दुखद खबर सामने आई है। बंगाल की राजनीति के वरिष्ठ नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का सोमवार को सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे। परिवार ने मीडिया को बताया है कि, उन्होंने सुबह करीब 1.30 बजे एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके बेटे  शुभ्रांशु रॉय ने बताया कि वह पिछले कई दिनों से कोमा में थे। लगभग चार दशक लंबे राजनीतिक जीवन में मुकुल रॉय ने कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और भाजपा तीनों दलों में मुख्य भूमिका निभाई है।
TMC के संस्थापक सदस्यों में शामिल रहे रॉय

मुकुल रॉय ने अपना राजनैतिक करियर की शुरुआत यूथ कांग्रेस से की और 1998 में ममता बनर्जी के साथ कांग्रेस से अलग होकर टीएमसी की स्थापना में मुख्य भूमिका निभाई। पार्टी के संस्थापक सदस्य के रुप में वह जल्द ही संगठन के प्रमुख स्तंभ बन गए और राष्ट्रीय महासचिव के पद तक पहुंचे।

फिर 2006 में पश्चिम बंगाल से राज्यसभा के लिए चुने गए और 2009 में उच्च सदन में टीएमसी के नेता बने। यूपीए-2 सरकार में, जब टीएमसी सहयोगी दल थी, उन्होंने पहले जहाजरानी राज्य मंत्री के रुप में और बाद में 2012 में रेल मंत्री के रुप में जिम्मेदारी संभाली। 2011 में वाम मोर्चा के 34 साल पुराने शासन के अंत के बाद राज्य में टीएमसी के संगठनात्मक विस्तार और राजनीतिक पकड़ मजबूत करने में भी उनकी मुख्य भूमिका निभाती है।

टीएमसी से मतभेद के बाद भाजपा का दामन थामा

मुकुल रॉय का राजनीतिक सफर काफी विवादों में रहा है। शारदा चिटफंड घोटाले और नारदा स्टिंग ऑपरेशन में उनका नाम सामने आया, जिसके बाद पार्टी नेतृत्व से उनके संबंधों में दरार आ गई। साल 2017 में रॉय ने भाजपा का दामन थाम लिया और बंगाल में पार्टी के संगठन को मजबूत करने व 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के बेहतर प्रदर्शन में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जब पार्टी ने राज्य की 42 में से 18 सीटें जीतीं। मुकुल रॉय ने साल 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की टिकट पर कृष्णानगर उत्तर सीट से जीत दर्ज की। लेकिन बाद में उनका भाजपा में प्रभाव अचानक से कम होने लगा। जिसके बाद उन्होंने जून 2021 में दोबारा टीएमसी में वापसी कर ली। 

क्या बोले दिलीप घोष?

मुकुल रॉय के निधन पर, BJP नेता दिलीप घोष ने उन्हें एक अनुभवी नेता बताया और कहा कि वह पिछले दो-तीन सालों से बीमार थे और राजनीति में सक्रिय रूप से हिस्सा नहीं ले पा रहे थे। घोष ने ANI से बात करते हुए कहा, "वह एक अनुभवी पॉलिटिशियन थे। वह यूनियन मिनिस्टर भी बने। जब वह BJP में आए, तो उन्हें बहुत सम्मान मिला। 2019-2021 तक, वह हमारे साथ थे। बाद में, उन्होंने BJP छोड़ दी और TMC में चले गए। पिछले 2-3 सालों से, वह बीमार थे और पॉलिटिक्स में एक्टिव रूप से हिस्सा नहीं ले पाए। मैं प्रार्थना करता हूं कि उनकी आत्मा को शांति मिले...।"
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