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Meerut Police का बड़ा एक्शन, 37 साल से रह रही Pakistani महिला गिरफ्तार, ISI लिंक की भी जांच

By LSChunav | Feb 17, 2026

उत्तर प्रदेश के मेरठ से अजब-गजब मामला सामने आया है। मेरठ के नादिर अली बिल्डिंग निवासी फरहत मसूद से शादी कर लगभग 37 साल पहले भारत में आई पाकिस्तान निवासी सबा मसूद उर्फ नाजिया ने वर्ष 2003 में दो अलग-अलग नाम से वोटर कार्ड बनवाए थे। इन दोनों नाम से ही वोटर कार्ड बनवाए थे। 

इस सोमवार को देहली गेट थाना पुलिस ने 23 साल बाद उस महिला ओक गिरफ्तार कर लिया। नाजिया और उसकी बेटी एमन फरहत पर फर्जी पासपोर्ट, वोटर कार्ड आदि बनवान के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद यह कार्रवाई की है। 

वर्ष 1993 में नाजिया पाकिस्तान से आई

एफआईआर दर्ज कराने वाली महिला ने नाजिया के आईएसआई से जुड़े होने की आशंका भी जताई है। देहली गेट स्थित कोठी अतानस की निवासी रुखसाना ने अपनी शिकायत में बताया कि जली कोठी की नादिर अली बिल्डिंग में रहने वाले बैंड व्यवसायी फरहत मसूद (पुत्र मसूद अहमद) ने वर्ष 1988 में पाकिस्तान के लाहौर जाकर सबा उर्फ नाजी उर्फ नाजिया नामक महिला से निकाह किया था।

इसके करीब 1 साल बाद वह पति फरहत के साथ लॉन्ग टर्म वीजा पर भारत आ गई और दंपति के 3 संतान हुई। इनमें दो बेटे भारत में हुए। वहीं, वर्ष 1993 में नाजिया पाकिस्तान गई। वहां पर उसने 25 मई 1993 को बेटी एमन फरहत को जन्म दिया। आरोप है कि पाकिस्तान से लौटते समय नाजिया अपने पाकिस्तानी पासपोर्ट पर एमन फरहत को भारत में ले आई।

यहां आने के बाद एमन का प्रवेश कैंट क्षेत्र के एक नामी स्कूल में करा दिया गया। चूंकि एमन का जन्म पाकिस्तान में हुआ था, इसलिए उस पर पाकिस्तानी नागरिक होने और कथित तौर पर जाली दस्तावेजों के जरिए भारत में रहने का आरोप लगाया गया है। दर्ज प्राथमिकी में सबा के पिता के बारे में भी संदेह व्यक्त किया गया है कि उनके संबंध पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से हो सकते हैं।

सबा के खिलाफ मिले सबूत, बढ़ेगी विदेशी अधिनियम की धारा

मेरठ के एसपी का कहना है कि साल 2003 की मतदाता सूची में सबा ऊर्फ नाजिया के दो अलग-अलग नाम मिले हैं। इसके अलावा वह खुफिया विभाग को बिना बताए सहारनपुर आदि स्थानों पर गई हैं। इस मामले में विदेशी अधिनियम की धारा बढ़ाई जाएगी। बता दें कि, फर्जी पासपोर्ट नहीं मिला। फिलहाल एसआईआर में सबा का मतदाता सूची से नाम कटा है या नहीं, इसकी जांच की जा रही है। एमन के खिलाफ अभी ठोस सबूत नहीं मिले हैं। 
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