By LSChunav | Sep 19, 2026
इस समय उत्तर प्रदेश के चुनाव को लेकर पूरे राज्य में राजनीतिक हलचल मची हुई है। विधानसभा चुना 2027 के चलते यूपी में सपा के हर एक जिले के लिए एक अलग घोषणापत्र जारी करने का निर्णय लिया है। अखिलेश 75 जिले-75 घोषणापत्र जारी कर स्थानीय मुद्दों पर फोकस कर रहे हैं।
इससे पार्टी को स्थानीय मुद्दों के आधार पर हर वर्ग के मतदाता को लुभाने में मदद मिल सकती है। सपा यूपी में अपने संगठन को मजबूत करने के साथ ही गैर-यादव ओबीसी और दलितों, विशेष रुप से गैर-जाटव समुदायों के बीच अपनी पैठ मजबूत करने में जुटी है।
दरअसल, सत्तारुढ़ भाजपा का धार्मिक और भावनात्मक मुद्दों को लेकर चुनाव से माहौल बनाने का मुकाबला करने के लिए सपा इस तरह की रणनीति पर काम कर रही है।
पीडीए पंचायत का गांवों में आयोजन
सपा सूत्रों के अनुसार, पार्टी ने गांवों में जिला इकाइयों द्वारा आयोजित 'पीडीए पंचायतों' में लोकसभा सांसदों समेत जातियों के अपने प्रमुख चेहरों को पूरे राज्य में तैनात किए है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि इन पंचायतों में खासकर वंचित जातियों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के बारे में बात कर उन्हें आश्वासन दिया जा रहा है कि चुनाव के बाद सपा सरकार बनने पर उनकी चिंताओं का समाधान किया जाएगा।
मतदाताओं के मूड को भांपने का काम सौंपा
समाजवादी पार्टी के अंदरुनी सूत्रों से पता चला है कि एटा से पार्टी सांसद देवेश शाक्य को अलीगढ़, हाथरस, मैनपुरी, कानपुर नगर और कानपुर देहात जिलों की 33 विधानसभा सीटों पर 'पीडीए पंचायतों' में भाग लेकर मतदाताओं के मूड को भांपने का काम सौंपा गया है। सांसद के अलावा शाक्य जाति के स्थानीय पार्टी चेहरे भी इन कार्यक्रमों में अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रहे हैं।
बूथ समितियों में समाज के हर वर्ग को समायोजित किया
सपा प्रवक्ता अब्दुल हफीज गांधी ने बताया है कि जिलावार घोषणापत्र जमीनी स्तर के वास्तिवक मुद्दों को शीर्ष पर ले जाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे। इतना ही नहीं, उन्होंन बताया कि यदि 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद सपा सरकार बनाती है तो जमीनी स्तर पर लोगों का सामना करने वाले बुनियादी समस्याओं का समाधन करना आसान हो जाएगा। पार्टी सूत्र ने बताया है कि पार्टी की बूथ समिति में अब 17 सदस्य शामिल हैं, जबकि इससे पहले पार्टी बूथ समितियों में सिर्फ 10 सदस्यों का चयन करती थी।