उत्तर प्रदेश में अगले साल 2027 में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। चुनाव का शंखनाद होने में मुश्किल से 6 महीने का समय बचा हुआ है। इस बीच, प्रदेश अध्यक्ष चौधरी ने करीब 6 महीने की कड़ी मेहनत के बाद वर्षों से पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों को हटाकर नए लोगों को मौका देकर नयापन लाने की कोशिश की जा रही है।
वहीं, कुछ पदाधिकारियों को पदोन्नति देकर भी टीम में उत्साह और कार्यकर्ता की आकांक्षाओं को उड़ान देने का प्रयास कर रही है।
यूपी में जिस टीम के सहारे 2027 विधानसभा चुनाव साधने की तैयारी की है उसमें कुछ ऐसे चेहरे भी है, जो जगह देने से रोक नहीं पा रहे हैं, जो उनकी इस टीम के लिए काफी आलोचना कर रहे हैं।
किनकों जगह नहीं मिली
बता दें कि, विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के पुत्र व नोएडा से विधायक पंकज सिंह समेत कई प्रमुख चेहरों को नई टीम में जगह नहीं मिली है। पंकज के जगह उनके छोटे भाई नीरज सिंह का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाना साबित कर दिया है कि पार्टी के बड़े नेताओं का टीम चयन पर किस स्तर तक प्रभाव रहा है।
प्रयोग और नया नेतृत्व उभारने का संदेशन देने के लिए प्रदेश अध्यक्ष व अन्य निर्णयकर्ताओं ने पुरानी टीम के आधे से ज्यादा चेहरों को बाहर कर दिया है, लेकिन जातियों की आबादी के लिहाज से पदाधिकारियों को दी गई भागीदारी में समानुपातिक असंतुलन स्पष्ट दिख रहा है।
आबादी के हिसाब से ब्राह्मणों को कम प्रतिनिधित्व
प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी करीब 12 से 14 प्रतिशत मानी जाती है, जबकि भूमिहार और त्यागी समुदाय की आबादी लगभग 1 प्रतिशत है। इसके बावजूद नई टीम में भूमिहार समाज को उनकी आबादी के मुकाबले ज्यादा जगह मिली है। 48 सदस्यों वाली नई टीम में चार पद भूमिहार नेताओं को दिए गए हैं, जबकि ब्राह्मण समाज को उनकी आबादी के अनुसार कम प्रतिनिधित्व मिला है।
इन लोगों को मिला है काम का इनाम
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा के टिकट पर जीती प्रयागराज की पूजा पाल को भी पार्टी में उपाध्यक्ष बनाकर राज्यसभा चुनाव के दौरान भाजपा के पक्ष में मतदान करने का इनाम दिया गया है। पार्टी के हिंदुत्व चेहरे के तौर पर चर्चित और प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष सहित कई महत्वपूर्ण पद पर रहे पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा को लंबे समय के बाद प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया। वहीं, कहा जा रहा है कि राणा को पश्चिम बंगाल के चुनाव में काम का इनाम दिया गया है।
33 प्रतिशत हिस्सेदारी से वंचित रहीं महिलाएं
बीजेपी ने महिलाओं को 33 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का संकल्प को देखते हुए पंकज चौधरी की नई टीम में महिलाएं भी अपेक्षा के अनुसार हिस्सेदारी पाने में पीछे रह गईं। टीम ने सिर्फ 12 महिलाओं को ही जगह मिली है, बल्कि 33 प्रतिशत की बात करें तो इन्हें 16 स्थान मिलने चाहिए थे।
लखनऊ-बाराबंकी को मिला विकल्प
दरअसल, लखनऊ और बाराबंकी जैसे जिलों से एक से अधिक पदाधिकारी बनाए गए हैं। वहीं, कुछ जिले में प्रतिनिधित्व पाने से वंचित रहे हैं। यही नहीं, बाराबंकी से एक ही जाति रावत (पासी) से प्रियंका रावत को उपाध्यक्ष और उपेंद्र रावत को महामंत्री बनाना बताता है कि पदाधिकारियों के चयन में संतुलन से ज्यादा पार्टी के प्रभावशाली नेताओं के बीच सामंजस्य और समन्वय और समझौते की चली है। बाराबंकी से ही अवधेश श्रीवास्तव को प्रदेश मंत्री बनाकर इस जिले को तीन पदाधिकारी दिए गए हैं।