West Bengal Election 2026: पहले चरण की 152 सीटों पर TMC-BJP की अग्निपरीक्षा, किसका पलड़ा भारी?

दिव्यांशी भदौरिया     Apr 18, 2026
शेयर करें:   
West Bengal Election 2026: पहले चरण की 152 सीटों पर TMC-BJP की अग्निपरीक्षा, किसका पलड़ा भारी?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में 152 सीटों पर टीएमसी और भाजपा के बीच एक निर्णायक मुकाबला होने वाला है, जिसमें उत्तरी बंगाल, जंगलमहल और अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों के विविध मतदाता परिणाम की दिशा तय करेंगे। यह विश्लेषण सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग और नंदीग्राम जैसी प्रमुख सीटों पर केंद्रित है, जो चुनाव की समग्र तस्वीर को प्रभावित कर सकती हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का पहला चरण 23 अप्रैल को होगा, जिसमें 152 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान होगा। यह चरण उत्तरी बंगाल, पश्चिमी जिलों और दक्षिणी बंगाल के कुछ हिस्सों में होने वाला है, जिस वजह से यह चुनाव के सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक बन गया है। इसे एक निर्णायक परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है जो 4 मई को होने वाली मतगणना के बाद चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकती है।


पहले चरण में कहां-कहां मतदान होगा?


पहले चरण में कूच बिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, उत्तर और दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, पुरुलिया, बांकुरा, झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर, पश्चिम बर्धमान और बीरभूम और नादिया के कुछ हिस्से शामिल हैं। प्रसार में सीमावर्ती जिले, आदिवासी बेल्ट, चाय बागान क्षेत्र और औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं।


ये हैं पश्चिम बंगाल में पहले चरण के निर्वाचन क्षेत्र


प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, कलिम्पोंग, कूच बिहार उत्तर और दक्षिण, रायगंज, इस्लामपुर, बालुरघाट, कई मालदा और मुर्शिदाबाद सीटें, आसनसोल, बांकुरा, पुरुलिया और बहरामपुर शामिल हैं।


आखिर ये चरण क्यों महत्वपूर्ण है?


इस चरण में विभिन्न मतदाता समूहों जैसे कि-आदिवासी समुदाय, चाय बागान मजदूर, अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र और शहरी मतदाता को एक साथ लाया गया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच यह एक महत्वपूर्ण मुकाबला है, जबकि वाम-कांग्रेस गठबंधन भी मैदान में है।


इस क्षेत्र में जंगलमहल, उत्तरी बंगाल और मुर्शिदाबाद-मालदा क्षेत्र शामिल हैं, जिससे यह विभिन्न जनसांख्यिकी और मुद्दों पर एक व्यापक राजनीतिक परीक्षा बन जाती है।


प्रमुख चुनावी मैदान और सीटें


सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, कूच बिहार, मालदा, मुर्शिदाबाद, बांकुरा, पुरुलिया और झाड़ग्राम में होने वाले चुनावों पर सबसे ज्यादा नजर रखी जा रही है। इन सीटों में सीमा संबंधी चिंताएं, आदिवासी मतदान पैटर्न और सत्ता विरोधी लहर जैसे कारक शामिल हैं। प्रमुख सीटों में नंदीग्राम का काफी महत्व बना हुआ है क्योंकि यह सुवेंदु अधिकारी का निर्वाचन क्षेत्र है। उत्तरी बंगाल का दिन्हाटा सीमावर्ती क्षेत्रों में भाजपा की ताकत को दर्शाता है, जबकि कृष्णागंज में जाति और सीमावर्ती आधार प्रमुख हैं। तामलुक और कोंटाई भी महत्वपूर्ण सीटें हैं जहां कड़ी टक्कर है।