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जालौर

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राजस्थान
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  • भारतीय जनता पार्टी


जालौर के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो साल 1952 में यहां पहली बार लोकसभा चुनाव हुआ था जिसे निर्दलीय प्रत्याशी भवानी सिंह ने जीता था। इसके बाद से इस सीट पर कांग्रेस ही जीतती रही। साल 1957 में सूरज रतन और 1962 में हरीश चंद्र माथुर की जीत हुई। 1967 के चुनाव में पर स्वतंत्रता पार्टी के डीएन पटोदिया की जीत होती है। इसके बाद 1971 में यहां पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की लेकिन 1977 का चुनाव यहां पर जनता पार्टी ने जीता। 1984 में सरदार बूटा सिंह यहां से सांसद बने लेकिन 1989 का चुनाव यहां पर पहली बार भाजपा ने जीता और कैलाश चन्द्र मेघवाल यहां की सांसद की कुर्सी पर बैठे। साल 1991 में एक बार फिर सरदार बूटा सिंह जीतकर संसद गए। इसके बाद साल 1999 तक यहां कांग्रेस का ही राज रहा और सरदार बूटा सिंह यहां से सांसद चुने गए। 1999 के चुनाव में भाजपा ने बंगारू लक्ष्मण को दलित चेहरे के तौर पर बूटा सिंह के खिलाफ खड़ा किया। लेकिन बंगारू लक्ष्मण यह चुनाव हार गए। इसके बाद 2004 के लोकसभा चुनाव में बंगारू लक्ष्मण की पत्नी सुशीला बंगारू को जालौर में भाजपा प्रत्याशी के तौर पर उतारा गया और उन्होंने बूटा सिंह को पराजित कर जालौर की पहली महिला सांसद होने का गौरव प्राप्त किया। जालौर लोकसभा के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं-


आहौर

जालौर

भीनमाल

सांचोर

रानीवाड़ा

सिरोही

पिंडवारा-आबू

रेवदर


2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के देवजी पटेल ने जालोर लोकसभा क्षेत्र में 2,61,110 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी, उन्होंने कांग्रेस के रतन देवासी को हराया, देवजी पटेल को 7,72,833 वोट मिले थे। भाजपा के देवाजी पटेल जालोर निर्वाचन क्षेत्र के निवर्तमान सांसद हैं। जालोर लोकसभा क्षेत्र राजस्थान के आसपास के क्षेत्र में आता है। जालोर लोकसभा क्षेत्र में आहोर, रेवदर (एससी), जालौर (एससी), रानीवाड़ा, भीनमाल, पिंडवाड़ा आबू (एसटी), सिरोही, सांचौर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 65.69% मतदान हुआ था। इस निर्वाचन क्षेत्र में कुल 16 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था।


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राजस्थान का एतिहसिक शहर जालौर जिसे प्राचीनकाल में 'जाबालिपुर' के नाम से जाना जाता था। जालौर लोकसभा सीट से वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी के सांसद देवजी पटेल हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में देवजी पटेल ने कांग्रेस की आंजणा उदयलाल को 3 लाख 81 हजार 45 मतों के भारी अंतर से हराया था। देवजी पटेल को 5 लाख 80 हजार 508 मत प्राप्त हुए थे जबकि आंजणा उदयलाल को 1 लाख 99 हजार 363 वोट ही मिल पाये थे। यहां कांग्रेस के बागी व पूर्व मंत्री सरदार बूटासिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर 1 लाख 75 हजार 344 वोट हासिल किए थे।


जालौर के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो साल 1952 में यहां पहली बार लोकसभा चुनाव हुआ था जिसे निर्दलीय प्रत्याशी भवानी सिंह ने जीता था। इसके बाद से इस सीट पर कांग्रेस ही जीतती रही। साल 1957 में सूरज रतन और 1962 में हरीश चंद्र माथुर की जीत हुई। 1967 के चुनाव में पर स्वतंत्रता पार्टी के डीएन पटोदिया की जीत होती है। इसके बाद 1971 में यहां पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की लेकिन 1977 का चुनाव यहां पर जनता पार्टी ने जीता। 1984 में सरदार बूटा सिंह यहां से सां....

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